ग्वालटोली स्थित आरोग्यधाम में होम्योपैथिक चिकित्सकों ने शहरवासियों को अनियंत्रित जीवनशैली, डायबिटीज, मोटापा एवं तनाव के कारण उत्पन्न होने वाली ह्रदय संबंधित बीमारियों के बारे में विस्तार से चर्चा करते हुए दुष्प्रभाव से बचने के उपाय बताएं। उच्च रक्तचाप के कारण गुर्दे पर विपरीत प्रभाव के साथ-साथ इसकी कार्यक्षमता प्रभावित होती है। आरोग्यधाम के वरिष्ठ होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ हेमंत मोहन ने बताया कि अत्यधिक कोलेस्ट्रोल युक्त पदार्थों के सेवन के साथ-साथ तंबाकू के अत्यधिक सेवन से कोरोनरी आर्टरी में अत्यधिक वसा जमने लगती है। जिसके फलस्वरूप यह वसा धमनियों में जमकर उसे सकरा कर देती है जिसे आरटीयोस्क्लेरोसिस कहते हैं। यही उच्च रक्तचाप का प्रमुख कारण है आरोग्यधाम की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर आरती मोहन ने बताया कि गर्भावस्था में महिलाओं में तनाव मोटापा एवं डायबिटीज के कारण उच्च रक्तचाप (प्रीइक्लैंपशिया) के कारण नवजात शिशु के शारीरिक एवं मानसिक विकास के साथ-साथ जीवन काल में उसे झटके आने लगते हैं।
कारण – सैचुरेटेड फैट का सेवन, क्रॉनिक रिनल फैलियर, कोरोनरी हार्ट ब्लॉकेज, अनिद्रा, डिप्रेशन, धूम्रपान, अनियमित जीवन शैली, हाई-फाई लाइफस्टाइल एवं अत्यधिक मोबाइल का प्रयोग
लक्षण – चक्कर आना, घबराहट, उलझन, बेचैनी, सीने में दर्द के साथ भारीपन, आंखों में अंधेरा, बाएं हाथ में दर्द, नींद ना आना, किसी काम में मन न लगना.
क्या करें – 6 से 8 घंटे की नींद ले, प्रतिदिन सुबह व्यायाम व सैर पर निकले; गुस्सा, तनाव एवं डिप्रेशन से दूर रहे, चिकित्सकीय सलाह से बीपी की दवा खाएं; ईको, ईसीजी, टीएमटी नियमित कराते रहे।
क्या ना करें नमक कम खाएं, अत्यधिक घी तेल चिकनाई ना खाएं, रात में देर तक न जागे, दर्द निवारक दवाएं, एंटीबायोटिक एवं स्टेरॉयड ना खाएं, नशे की एवं नींद की गोली ना खाएं।
जटिलताएं – ब्रेन हेमरेज के साथ पैरालिसिस हो सकता है , गुर्दा फेल हो सकता है। होम्योपैथिक चिकित्सकों ने दावा किया कि प्रारंभिक अवस्था में होम्योपैथिक दवाएं अपनाने से उच्च रक्तचाप में एवं उससे होने वाले दुष्प्रभावों से काफी हद तक बचा जा सकता है।


















