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हिंदू धर्म में शनि जयंती का अधिक महत्व है। ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को शनि जयंती मनाई जाती है। मान्यता है इस दिन सूर्य देव के पुत्र शनिदेव का जन्म हुआ था। जिसके चलते सोमवार को पूरे देश में शनि जयंती मनाई गई। कानपुर में भी मंदिरों में सुबह से ही भक्तों की भीड़ देखने को मिली। जगह जगह धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।
हिंदू मान्यताओं के अनुसार, शनिदेव को न्याय का देवता कहा जाता है। शनि देव कर्म के हिसाब से हर किसी को फल देते हैं। वहीं जिस व्यक्ति पर शनिदेव मेहरबान होते हैं उसे रातोंरात धनवान बना देते हैं। शनि जयंती के दिन शनि देव की पूजा करने के साथ-साथ कुछ चीजों का ध्यान जरूर करना चाहिए। मान्यता है कि इस दिन दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही शनि दोष , शनि साढ़े साती और ढैय्या के प्रभाव को कम करने में मदद मिलती है। शनि जयंती के दिन काले तिल का दान करना शुभ माना जाता है। इससे शनि की साढ़े साती और ढैय्या से राहत मिलती है। वहीं इस दिन उड़द की दाल का भी दान करना अच्छा माना जाता है। मान्यता है कि शनि देव की कृपा पाने के लिए सवा किलो काली उड़द की दाल किसी जरुरतमंद को दान करने से धन संबंधी समस्याओं भी खत्म हो जाती है। शनि जयंती के अवसर पर शहर भर के मंदिरों में कई कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। भंडारा, जागरण , हवन पूजन आयोजित किए गए।

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