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जाजमऊ की जनता नरकीय जीवन जीने को मजबूर!

कानपुर में नालों की सफाई का काम तेजी से चल रहा है, मगर हकीकत में यह सफाई सिर्फ कागजों पर चल रही है।
कानपुर में फरवरी माह में नालो की सफाई के लिए नगर निगम द्वारा अभियान की शुरुआत की गई,, और बारिश से पहले कानपुर के सभी नालों की सफाई के लिए एक निश्चित तिथि रखी गई,, नाले की सफाई में लापरवाही के चलते दिन प्रतिदिन नई नई तिथियां रखी गई,, और अब हकीकत यह है कि कानपुर नगर निगम द्वारा जिन नालों को साफ होने का ढिंढोरा पीटा जा रहा है, वे अब भी सिल्ट और गंदगी से बजबजा रहे हैं। कुल मिलाकर नींद से जागने के बाद नगर निगम को समय सीमा की याद आई तो नाला सफाई के नाम पर लीपापोती कर दी गई।
आपकी स्क्रीन में जो तस्वीरे दिखाई जा रही है वह कानपुर के जाजमऊ वार्ड 96 के बुढ़िया घाट की है,, तस्वीरें देखकर अपने अंदाजा तो लगा ही लिया होगा कि नाला सफाई के नाम पर किस तरह से लापरवाही बरती गई है।
इस लापरवाही का पूरा श्रेय नगर निगम के साथ साथ क्षेत्रीय पार्षद जरीना खातून को दिया जाता है।
इनके द्वारा क्षेत्र का काम समय से कभी नही किया गया। मानो क्षेत्र के विकास कार्यो के प्रति इनकी कोई रुचि ही नही है,, सिर्फ है तो थाने चौकी में होने वाली पीस कमेटी की बैठकों में।
पार्षद जरीना खातून की लापरवाही के चलते बुढ़िया घाट का हाल बेहाल है,, वीडियो में साफ देखा जा सकता है,, नालों की सफाई के नाम पर नाले खुले छोड़ दिये गए सील्ड सड़कों व गंगा किनारे फेंक दी गई, आलम यह है कि क्षेत्रीय जनता का हर एक कदम मौत के मुहाने पर है।
समाजसेवी कामरान खान ने बताया 3 से 4 दिन पहले नालो की सफाई का काम शुरू हुआ था लेकिन मालवा यही पड़ा हुआ है,, मालवा को उठाने के लिए क्षेत्रीय पार्षद और छूटभैये नेताओ में विवाद चल रहा है,, क्षेत्रीय जनता को विवाद नही चाहिए काम चाहिए।

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