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हर्षोल्लास के साथ मनाया गया गुरु पूर्णिमा का उत्सव

कानपुर,श्री प्रखर परोपकार मिशन ट्रस्ट के तत्वाधान में यज्ञ सम्राट महामण्डलेश्वर स्वामी श्री प्रखर महाराज का चित्र लगाकर आनन्द एम. वी. आर. अपार्टमेन्ट, पार्वती बागला रोड कानपुर में गुरु पूर्णिमा का कार्यक्रम महाराज श्री के शिष्यों द्वारा बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। जिसमें चित्र पूजन कर आरती की।सभी शिष्यों ने महाराज श्री से वीडियों कालिंग के माध्यम से सीधे वार्ता कर आशीर्वाद प्राप्त किया जो अपने आप में आधुनिक व्यवस्था थी। महाराज ने अपने भक्तों से वीडियों कालिंग के माध्यम से एक श्लोक के माध्यम से आशीर्वाद प्रदान किया धर्मज्ञो धर्मकर्ता च सदा धर्मपरायणः । तत्वेभ्यः सर्वशास्त्रार्थदेशको गुरूरूच्यते ।जिसका अर्थ है कि धर्म को जानने वाले, धर्म मुताबिक आचरण करने वाले, धर्मपरायण और सब शास्त्रों में से तत्वों का आदेश करने वाले गुरू कहे जाते हैं।
महाराज श्री ने आगे बताया कि आषाढ़ शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा के रूप में पूरे देश में उत्साह के साथ मनया जाता है। भारतवर्ष में कई विद्वान गुरू हुए है किन्तु महर्षि वेद व्यास प्रथम विद्वान थे, जिन्होने सनातन धर्म (हिन्दू धर्म) के चारों वेदों की व्याख्या की। सुरेश गुप्ता, ने अपने उदगार प्रकट करते हुए कहा कि आषाढ़ की पूर्णिमा ही क्यों है गुरू पूर्णिमा आषाढ़ पूर्णिमा को चुनने के पीछे गहरा अर्थ है, अर्थ है कि गुरू तो पूर्णिमा के चंद्रमा की तरह है जो पूर्ण प्रकाशमान है और शिष्य आषाढ़ के बादलों की तरह आषाढ़ में चंद्रमा बादलों से घिरा रहता है जैसे बादल रूपी शिष्यों से गुरू घिरे हों, शिष्य सब तरह के हो सकते हैं, जन्मों के अंधेरे को लेकर छांएं, वे अंधेरे बादल की तरह ही हैं, उसमें गुरू भी चांद की तरह चमक सके, उस अंधेरे से घिरे वातावरण में भी प्रकाश जगा सके, तो ही गुरू पद की श्रेष्ठता है, इसलिए आषाढ़ की पूर्णिमा का महत्व है। इसमें गुरू की तरफ भी इशारा है!कार्यक्रम आयोजक श्री विश्वनाथ कानोडिया ने आए हुए महाराज श्री के शिष्यों को प्रखर परोपकार संदेश नामक पुस्तक का वितरण किया और कहा कि महाराज जैसे महापुरूष सदियों में जन्म लेते हैं।कार्यक्रम में सर्वश्री सुरेश गुप्ता, नरेश चंद्र त्रिपाठी ( एड.) अध्यक्ष कानपुर बार एसोसियेशन, विश्वनाथ कानोडिया, प्रदीप गुप्ता, धर्मेन्द सिंह धर्म (एड.), सुशील तुलस्यान, मदन कानोडिया, आदि उपस्थित थे!

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