भारतीय बाल रोग अकादमी द्वारा विश्व स्तनपान सप्ताह के अन्तर्गत प्रखर हास्पिटल आर्य नगर कानपुर नगर में नर्सिंग स्टाफ को स्तनपान पर ट्रेनिंग का कार्यक्रम का आयोजन किया गया है कार्यक्रम का संचालन पूर्व डी०जी०एम०आई० डॉ० वी०एन० त्रिपाठी, डॉ० अमित चावला, डॉ० सुबोध बाजपेयी व डॉ० सायनी सेट्ठी ने किया कार्यक्रम का संचालन करते हुए डॉ० वी०एन० त्रिपाठी ने बताया कि एक माँ के अन्दर पूरी क्षमता है कि वह अपने द्वारा जन्म दिए हुए एक या जुड़वा 2-3 बच्चों को केवल अपना ही दूध जन्म से 06 माह तक भर पेट पिला सके। आर्थिक दृष्टि से विवेचना की गई कि भारत के शिशुओं को अपनी माँओं से कुल मिलाकर लगभग 80 करोड़ ली० दूध की आवश्यकता स्तनपान से कराई जा सकती है, जबकि आकलन के अनुसार केवल लगभग 40 करोड़ ली० दूध स्तनपान द्वारा कराया जाता हैं शेष दूध की मात्रा जानवर व डिब्बों के दूध से की जाती है। अनुमानतः प्रतिमाह शिशु को ऊपरी दूध का व्यय लगभग रूपया 1500-2000 है जबकि माँ का दूध अनमोल है और निःशुल्क है। हर समय शुद्ध ताजा है व उसमें कोई मिलावट नही हो सकती है डॉ० सुबोध बाजपेयी ने बताया कि स्तनपान करने वाले बच्चे मानसिक रूप से ज्यादा विकसित होते है और प्रौढ़ अवस्था में डायबिटीज दिल की बीमारियों एवं कैंसर जैसे घातक रोगों से भी बचे रहते है। माँ की छाती व बच्चेदानी में कैसर की कमी आती है ।
डॉक्टर्स द्वारा दी गई सलाह माँ का दूध बच्चो के लिए है लाभकारी


















