कानपुर, आजादी की 75 वीं वर्षगांठ पर समाज सेविका नूरी शौकत ने बताया कि आओ झुककर सलाम करे उनको
जिनके हिस्से में यह मुकाम आता है खुशनसीब होता है वह खून जो देश के काम आता है ” आज देश स्वतंत्रता दिवस मना रहा है यह आजादी हमे यूंही नही मिली इसके लिए न जाने कितने फांसी के फंदे पर झूले थे और न जाने कितनो ने गोली खाई थी तब जाकर हमने आजादी पाई थी देश ऋणी है उन क्रांतिवीरों का जिन्होंने देश को गुलामी की जंजीरों से मुक्त कराने के लिए सर्वस्व न्योछावर कर दिया !इन वीर सेनानियो में अनेक महिलाए भी थी जिन्होंने ना केवल क्रांतिकारियों की सहायता की बल्कि संगठनों व सभाओं का नेतृत्व भी किया !सलाम है इन नारी शक्ति को , रानी लक्ष्मी बाई , विजय लक्ष्मी पंडित , सरोजनी नायडू , कस्तूरबा गांधी , कमला नेहरू , लक्ष्मी सहगल , झलकारी बाई , इन स्वतंत्रता सैनानियों को दिल से सलाम !
” भारत छोड़ो ” का नारा यूसुफ मेहर अली ने दिया था ” जय हिन्द ” का नारा आबिद हसन सफ़रानी ने दिया था अल्लामा इकबाल ने तराना _ए _हिन्द सारे जहां से अच्छा हिंदोस्तान हमारा लिखा था ” इंकलाब जिंदाबाद ” का नारा हसरत मोहानी ने दिया था
सुरैया तय्यब जी ने तिरंगा को वह रूप दिया , जो हम आज देखते है “मादरे वतन भारत की जय” का नारा 1857 में अजीम उल्लाह खान ने दिया था ” सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है ” इसे 1921 में बिस्मिल अजीमाबादी ने लिखा था!मरकर भी खुशनसीब वो है जो देश पर मिट जाते है “सीने पर गोलियां खाकर वो ,तिरंगे में लिपट सो जाते है


















