– कानपुर भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को यानी मंगलवार को सुहागन महिलाएं हरितालिका तीज की पूजा करेंगी। इस तीज के पर्व में सुहागन महिलाएं अपने सुहाग की दीर्घायु की कामना के साथ पूरे दिन बिना खाये और निर्जला व्रत रखकर भगवान शिव और पार्वती की पूजा करती हैं। हालांकि बात की जाए इस तीज के व्रत की तो यह व्रत और व्रतों की अपेक्षा बहुत ही कठिन माना जाता है, क्योंकि 24 घंटे तक बिना पानी के और बिना खाने के रहकर महिलाओं को यह व्रत रखना पड़ता है। हरितालिका व्रत को हरितालिका तीज या तीजा भी कहा जाता है, हरितालिका तीज यानी वह दिन जिस दिन माता पार्वती ने भगवान शिव को पाने के लिए आराधना की थी तबसे यह प्रथा तीज पर्व की चली आ रही है। इस दिन सुहागन महिलाएं निर्जला व्रत रखकर उनकी दीर्घायु की कामना करती हैं। वही कानपुर में भी आज और कल दो दिन तीज का व्रत मनाया जा रहा है। हरितालिका तीज के पर्व को लेकर बाजारों में रौनक है, जहां पर महिलाएं तीज के पूजन की सामग्री को खरीदते हुए नजर आ रही है। भगवान शंकर-पार्वती की मिट्टी से बनी हुई मूर्तियां खरीदते नजर आ रहे तो वही कई चीजें जो तीज के पूजन के लिए प्रयोग में आती हैं । पति के लिए पिछले 15 वर्षों से तीज का व्रत रखती आ रही प्रतीक्षा ने बताया कि यह व्रत मां गौरी ने शिव जी के लिए रखा था उन्हें पाने के लिए इस दिन सुहागिन महिलाएं निर्जला व्रत रखती है और शाम को पूजन करते हुए पति की दीर्घायु और यश की कामना करती है। वहीं खेरेपति मंदिर के पुजारी राजीव दीक्षित ने बताया कि यह अखंड सौभाग्य के प्रतीक का व्रत है। यह हिंदुओ का कठिन व्रत होता है। इस दिन सुहागिन महिलाओं को सोने का निषेध है।रात्रि में भजन-कीर्तन के साथ रात्रि जागरण भी करना पड़ता है इस दिन कानपुर के बैभव लक्ष्मी मन्दिर में कुवारी कन्याओं के हाथों में मेहंदी लगाई जाती हैं जिससे उनकी साल भर के अंदर शादी हो जाती है और इस मंदिर में सुहागिन महिलाओं को श्रृंगार का समान भी दिया जाता है ।महिलाएं सोलह सिंगार करती हैं और शुभ मुहूर्त में भगवान की पूजा करती है इस पूजा में शिव पार्वती की मूर्तियां का विधिवत पूजन किया जाता है।।
भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को हरितालिका तीज


















