कहते हैं चोर चोर कोतवाल को डांटे यही हाल इस समय नगर निगम कानपुर नगर का है।जहाँ उत्तर प्रदेश की योगी सरकार घूसखोरी को रोकने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। समय समय पर बड़े अधिकारियों के तबादले भी हो रहे हैं। लेकिन कानपुर नगर निगम का हाल बत से बत्तर है। नगर निगम में जन्म मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए आम जनता को मोटी रकम खर्च करनी पड़ती है। आप को बता दे कि नगर निगम में जन्म मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए सरकारी फीस ₹10 रुपए है। लेकिन यहां पर दलालो के बगैर काम नही होता है। जहां प्रमाण पत्र बनवाने के लिए हजारों रुपए खर्च करने पड़ते हैं। जो यहां रकम नही देता है। उनको ऑफिस टू ऑफिस दौड़ाया जाता है। वही आवेदक दीपक गुप्ता व पवन शर्मा ने बताया कि एक महीने पहले वे अपने बच्चे के लिए जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के लिए आवेदन किया था। लेकिन अभी तक मेरी कोई सुनवाई नही हुई है। वही बर्रा विश्व बैंक के रहने वाले सौरभ सक्सेना ने बताया की अपने बच्चे के प्रमाण पत्र बनवाने के लिए पहले नगर निगम में आवेदन किया था। लेकिन नगर निगम ने कितने चक्कर लगवा दिया है। उसके बाद भी काम नही हुआ अब कहे रहे है की एसीएम 7 के ऑफिस जाकर पता करो वही और कितने आवेदकों ने बताया कि जब नगर निगम से वे अपना सर्टिफिकेट लेने गए तो उनको ये कह कर लौटा दिया गया कि उनका सर्टिफिकेट ए सी एम 7 ऑफिस में पड़ा हुआ है। लेकिन जब ए सी एम 7 ऑफिस पहुचे परमिशन के लिए रक्खे आवेदन पत्र में आवेदक का आवेदन पत्र ही नही था आवेदन पत्र अभी आया ही नही है। आवेदक फिर नगर निगम के चक्कर काटने लगा आप को बताते चले पूरी तरह से घुस खोरी का अड्डा बन चुका नगर निगम अपना ठीकरा जिलाधिकारी के ए सी एम 7 व उनके बाबू पर फोड़ रहा है। जब मीडिया ने इसकी जाँच पड़ताल के लिए ए सी एम 7 आफिस में पता लगाने के लिए गया वहाँ पर पता चला की ए सी एम 7 जन्म- मृत्यु प्रमाण पत्र में परमिशन प्रदान करते है उनके कार्यालय में 50 से 60 के लगभग आवेदन पत्र जन्म-मृत्यु पेंडिंग है उनके कार्यालय में नगर निगम के बाबुओ की कमियों के कारण आवेदन पत्र में लिखित में कमी दी जाती है, इससे यह तो समझ आ ही गया कि अगर परमिशन जिलाधिकारी कार्यालय से न होगी तो न जाने कितने फर्जी और गलत सर्टिफिकेट नगर निगम जारी करेगा, पुनः जानकारी के अनुसार नगर- निगम के बाबुओ द्वारा जानबूझ कर आवेदन पत्र तीन-तीन माह तक परमिशन हेतु जिलाधिकारी कार्यालय अनुमति हेतु नही भेजे जाते है जनता को यह बोलते है कि ए सी एम 7 परमिशन नहीं दे रहे है जब कि बाबू आवेदन पत्र अपने पास रख्खे रहते है। वही जो आदमी पैसा इन बाबुओ को देता है उनकी परमिशन तुरत भेज कर परमिशन करा देते है ए सी एम 7 द्वारा कई बार नगर स्वास्थ्य अधिकारी को बाबुओ को आवेदन पत्र देर से भेजने व आवेदन पत्रों की कमी को लेकर दूरभाष व लेटर लिख कर अवगत कराया गया लेकिन उन बाबुओ पर नगर स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा कोई भी कार्यवाही नही की गई वही उल्टा ए सी एम 7 व बाबू की शिकायत की जाती है। वही नगर निगम के अधिकारी व कर्मचारी दलालो के चलते अपना काम सही से नहीं करते जिसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ता है। आप को बता दे की 5 साल पहले इस तरह से कई डाकुमेंट नगर निगम के कूड़े खाने में मिले थे जिसके चलते नगर निगम मीडिया की सुसुर्खियों में बना हुआ था। अब देखने वाली बात होगी यह होगी की हजारों आवेदकों के फार्म कहा पर पड़े हुए है। जिसकी जानकारी नगर निगम कार्यालय के पास में नही है। वही आवेदक अपने परिजनों के प्रमाण पत्र बनवाने के दर-दर भटक रहे हैं



















