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कानपुर पिछले पाच सालों से पैर के अल्सर से पीडित एक 49 वर्षीय व्यक्ती का कानपुर स्थित अपोलो स्पेक्ट्रा के वैस्कुलर सर्जन डॉ.अचिंत्य शर्मा के नेतृत्व में एक डॉक्टर की टीम ने यह सर्जरी की हैं।निमिश कुमार(बदला हुआ नाम)ठीक से चलफिर नही पा रहे थे।2012 में वैद्यकीय जाचं अहवाल में उन्हें पैर के अल्सर का निदान हुआ।कई डॉक्टर से इलाज करवाया, लेकिन सेहत में कोई सुधार नहीं हुआ।फरवरी 2022 में उनकी तबीयत काफी बिगडने लगी।वह पैरों पर खडे नही हो सकते थे।उनकी सेहत को देखकर परिवार वालों ने उन्हें कानपुर के अपोलो स्पेक्ट्रा अस्पताल दाखिल किया।यहॉं डॉक्टरोंने किए इलाज के कारण मरीज को नई जिंदगी मिली हैं।सर्जरी के बाद मरीज पहले की तरह फिर से अपने पैरों पर चलने लगा हैं।कानपुर स्थित अपोलो स्पेक्ट्रा अस्पताल के वैस्कुलर सर्जन डॉ.अचिंत्य शर्मा ने कहॉं की, “मरीज के निचले बाएं में दोन अल्सर थे।इस मरीज का वजन 105 किलोग्राम था। टाँगों के छाले सभी देशों में स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियों पर भारी बोझ डालते हैं,साथ ही व्यक्तिगत रोगी और उनके रिश्तेदार के लिए बड़ी परेशानी और असुविधा का कारण बनते हैं।पैर के अल्सर के लिए ड्रेसिंग के साथ इलाज किया जाता हैं।कई बार इसे “वैरिकाज़ नसों” के रूप में जाना जाता है।डॉ शर्मा ने आगे कहा,”बाएं निचले पैर का बड़ा अल्सर 15 सेमी × 12 सेमी × 3 सेमी का था। और छोटा अल्सर 6 सेमी × 3 सेमी × 1 सेमी (गहराई) का था।सर्जरी कराके इस अल्सर को हटाया गया और निचले अंग पर एक डॉपलर अल्ट्रासाऊंड किया गया था।सर्जरी के बाद मरीज की सेहत में सुधार देखकर उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज दिया गया।और उन्हें प्रतिदिन ड्रेसिंग बदलने की सलाह दी गई हैं।मरीज निमिश कुमार ने कहॉं की, “पैर के अल्सर के कारण में काफी दर्द में था।अपने पैरों पर चल नहीं सकता था।दैनिक गतिविधियों के लिए परिवारवालों पर निर्भर था। बिस्तर पर रहने के कारण मेरा वजन भी बढने लगा था। लेकिन अपोलो स्पेक्ट्रा अस्पताल के डॉक्टरों के कारण मुझे नई जिंदगी मिली हैं।मुझे फिर से अपने पैरों पर खड़े होने में मदद करने के लिए डॉक्टरों को धन्यवाद देता हूं।अब अल्सर ठीक हो रहा हैं और मैं बेहतर महसूस कर रहा हूं।

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