राष्ट्रीय शर्करा संस्थान, कानपुर का 87 वां स्थापना दिवस प्रगतिशील गन्ना किसानों और संस्थान के सेवानिवृत अधिकारियों के अभिनंदन करते हुये मनाया गया। इस कार्यक्रम में प्रो. विनय पाठक, कुलपति CSJM विश्वविद्यालय और डॉ. सुशील सोलोमन, भूतपूर्व कुलपति CSA कृषि एवं तकनीक विश्वविद्यालय, कानपुर क्रमशः मुख्य एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे संस्थान ने इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के उन आठ गन्ना कृषकों को सम्मानित किया जिन्होने नई गन्ना की प्रजातियों को उगाया और व्यवस्थित तथा वैज्ञानिक पद्धति से उच्च उत्पादकता प्राप्त करते हुये उदाहरण प्रस्तुत किया। यह किसान हरदोई, सीतापुर, • शाहजहाँपुर, गोंडा और बलरामपुर जिलों के हैं, जिन्होने 150 मीट्रिक टन/ हेक्टेयर की दर से अथवा उससे भी अधिक की उत्पादकता प्राप्त की जो राज्य और देश के औसत उत्पादन का लगभग दोगुना है इस अवसर पर संस्थान ने यहाँ से सेवानिवृत संकाय सदस्यों एवं अन्य अधिकारियों को भी सम्मानित किया जिनके अभूतपूर्व योगदान के कारण आज संस्थान अपनी वैश्विक उपस्थिति दर्ज करवा रहा है एवं जिसके कारण दक्षिण एसियाई देशों और अफ्रीका के विद्यार्थी इस संस्थान में पढ़ाई के लिए आकर्षित हो रहे हैं शर्करा अभियांत्रिकी के आचार्य श्री डी. स्वेन ने स्वागत भाषण दिया एवं तत्पश्चात शर्करा प्रौद्योगिकी के सहायक आचार्य श्री एस के त्रिवेदी ने भारतीय चीनी उद्योग और राष्ट्रीय शर्करा संस्थान के प्रगतिशील इतिहास पर अपनी प्रस्तुति दी जिसमे उन्होने बताया कि स्वतंत्रता प्राप्ति के समय जहाँ देश 1.0 मिलियन मीट्रिक टन की अल्प चीनी उत्पादन के कारण चीनी के आयात पर निर्भर था वहीं आज हम 35 मिलियन मीट्रिक टन चीनी के उत्पादन के साथ 10 मिलियन मीट्रिक टन से अधिक चीनी का निर्यात भी कर रहे हैं। आज तकनीकी दक्षता मीलों आगे जा चुकी है और इसका श्रेय राष्ट्रीय शर्करा संस्थान, कानपुर को भी जाता है जिसने इस उद्योग को तकनीकी दक्ष मानव संसाधन उपलब्ध कराये हैं अपने सम्बोधन में निदेशक राष्ट्रीय शर्करा संस्थान, कानपुर श्री नरेंद्र मोहन ने गन्ना किसानों और संस्थान के भूतपूर्व अधिकारियों को बधाई देते हुये भारत सरकार के द्वारा किए गए नीतिगत प्रयासों का उल्लेख किया जिसमे उन्होने बताया कि भारत सरकार की नीतियाँ यथा नई ईथनोल इकाइयों की स्थापना अथवा उपलब्ध ईथनोल इकाई के विस्तार में आर्थिक सहयोग ईथनोल के लिए अलग अलग मूल्य निर्धारण और चीनी के विक्रय के लिए न्यूनतम मूल्य निर्धारण आदि के कारण जहाँ आज ईथनोल की उत्पादन क्षमता बढ़ाने और पेट्रोल में 10% ईथनोल के मिश्रण के लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद मिली है, वहाँ चीनी की कीमत स्थिर रखने और गन्ना किसानों को तत्काल भुगतान में सहयोग मिला है डॉ. सुशील सोलोमन, भूतपूर्व कुलपति CSA कृषि एवं तकनीक विश्वविद्यालय, कानपुर ने अपने सम्बोधन में संस्थान को उसके स्थापना दिवस की बधाई देते हुये कहा कि मिल मालिक और किसान एक ही सिक्के के दो पहलू हैं अतः इनके बीच बेहतर पारस्परिक संबंध खेती और कारखाने की उत्पादकता बढ़ाने के लिए के लिए अति आवश्यक है अपने सम्बोधन में CSIM विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विनय पाठक ने भारतीय शर्करा उद्योग के विकास में तथा हाल के दिनों में ईथेनोल मिश्रण कार्यक्रम में राष्ट्रीय शर्करा संस्थान, कानपुर के द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना की और कहा कि आज शुगरकेन वैल्यू चेन की अप्रयुक्त क्षमता को प्राप्त करने के लिए न्यूनतम लागत और यूजर फ्रेंडली तकनीक के विकास की आवश्यकता है जिससे नए निवेश के क्षेत्र विकसित करने के साथ-साथ नए रोजगार के अवसर विकसित होंगे और इससे ग्रामीण क्षेत्रों में समृद्धि आएगी कार्यक्रम में डॉ. अशोक कुमार, सहायक आचार्य- कृषि रसायन ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
राष्ट्रीय शर्करा संस्थान का स्थापना दिवस समारोह


















