इस्कॉन कानपुर प्रांगण में बहुत ही धूमधाम के साथ गोवर्धन पूजा का समारोह मनाया गया। इस मौके पर मंदिर में सुबह से ही विभिन्न समारोह आयोजित किए गए। श्री राधा माधव जी का बहुत ही भव्य श्रृंगार किया गया और सुबह से ही गोवर्धन जी के निर्माण कार्य में मंदिर के पुजारी श्रीमान ब्रज कन्हाई प्रभु जी ने गोवर्धन की बहुत अभूतपूर्व रचना मंदिर में की जिसमे श्याम कुंड ,राधाकुंड मानसी गंगा, गोविंद कुंड समेत विभिन्न तीर्थो का निरूपण किया गया । कानपुर के विभिन्न क्षेत्रों से आए हुए भक्तों ने गोवर्धन को 1008 से ज्यादा भोग को अर्पण किया गया । गोवर्धन पूजा का लाभ उठाने के लिए मंदिर में हजारों भक्तों की भीड़ उमड़ी हुई थी, सभी ने उत्साहपूर्वक गोवर्धन को भोग लगाया , गोवर्धन की चार बार परिक्रमा की और हरे कृष्णा कीर्तन केतन के धुन पर नृत्य करते हुए गोवर्धन पूजा में और आरती में भाग लिया।
सुबह की भागवत कथा में श्रीमन दिव्य निताई प्रभु जी ने गोवर्धन पूजा के इतिहास के बारे में बताते हुए सूचित किया कि पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान श्री कृष्ण ने इस लीला के माध्यम से इंद्र के गर्व का मदन किया, हमें धन और पद के मद में गर्वित नहीं होना चाहिए, साथ ही साथ देवताओं की पूजा से क्षडिक सुख की प्राप्ति ही रहने वाली है किंतु भगवान श्री कृष्ण की भक्ति करने से हमें स्थाई गोलोकधाम की प्राप्ति होती है जो कि कलयुग में हम हरे कृष्ण महामंत्र के जप और कीर्तन द्वारा प्राप्त कर सकते हैं । इस लीला के द्वारा भगवान श्री कृष्ण ने प्रकृति के प्रति अपने प्रेम और कृतज्ञता को भी जाहिर किया है।



















