कानपुर, गुरूद्वारा बाबा नामदेव में कानपुर का क्षत्रीय टॉक सभा द्वारा आयोजित बाबा नामदेव पर्व पर सुबह
सरदार नीतू सिंह के नेतृत्व में दीवन गुरुग्रंथ साहिब के अखण्ड पाठ की समाप्ति के उपरान्त हजूरी रागी भाई हरदीप सिंह व देहरादून से आये भाई बलविन्दर सिंह कथा वाचक द्वारा शिरोमणि भगत के इतिहास के बारे में बताया गुरूनानक देव के लगभग दो सौ वर्ष पहले इनका जन्म महाराष्ट्र में हुआ था। तत्कालीन समय के शासक शासनीय औदेदारों द्वारा छोटी जाति होने के कारण अनेक प्रकार से उनको परेशान किया गया उनके इश्वरीय प्रेमाभाव के कारण कलयुग जैसे समय में 72 बार विभिन्न रूपों में ईश्वर के दर्शन हुए वैसे ईश्वर सब में विराजमान है पर जब प्रेमाभाव में उनका कोई सुमिरन करता है तो वास्तविकता में उसको ईश्वर प्राप्ति का बोध होता है। उनकी वाणी गुरुग्रंथ साहिब में अंकित है जिसको सम्मानपूर्वक गुरुनानक नामलेवा संगत नित्यप्रति नतमस्तक व वाणी का गुणगान करती है। लुधियाना व दरबार साहब अमृतसर से आये हजूरी रागी भाई अरविन्दर सिंह नूर के जत्थे द्वारा गुरूवाणी सबद गायन किये गये।जिउ जिउ नामा हरिगुण उच्चरै, भगत जना का देहुरा फिरै।। एक भगत मेरै हृदय बसै, नामै देख नारायण हसै ।राम को नाम जपहु दिन राती मप मप काटो जम की फांसी सबद पर संगत को निहाल किया।इस विशेष अवसर पर मीरी पीरी बालसभा के लगभग सैकड़ो बच्चों द्वारा गुरू सिखी वेशभूसा व गुरू नानक देव जी की वाणी के अनेक सबद संगत के बीच में जपाये। वाहे गुरू का सिमरन किया सत् नाम वाहे गुरू के नारे लगे।विशेष रूप से कानपुर का क्षत्रिय टांक सभा, स्त्री सत्संग बाबा नामदेव, मीरी पीरी बालसभा व गुरूद्वारा कमेटी द्वारा संगतों की सेवा, लंगर प्रसादा वितरण किया गया व सम्मान स्वरूप सिरोपा व बच्चों के लिये अनेक प्रकार के पुरस्कार सम्मान बाँटे गये।



















