आजादी के 75 वर्ष के अमृत महोत्सव की पावन बेला में आज दिनांक 10 दिसंबर 2022 को डी.ए-वी. कॉलेज, कानपुर के रक्षा एवं स्त्रातेजिक अध्ययन विभाग द्वारा आई.सी.एस.एस.आर. नई दिल्ली द्वारा वित्तपोषित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी शीर्षक “भारत की साइबर सुरक्षा: चुनौतियाँ एवं विकल्प” (India’s Cyber Security: Challenges and Options) के उद्घाटन सत्र का प्रारम्भ महाविद्यालय के सभागार मे प्रातः 10:00 बजे किया गया। उद्घाटन सत्र का संचालन डॉ वी.के. दुबे द्वारा किया गया। इस क्रम में मंच सृजन चेयर पर्सन के रूप में मैडम अनंता स्वरूप, वरिष्ठ सदस्य, बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट, डी.ए-वी. कॉलेज, कानपुर, मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता के रूप में माननीय न्यायमूर्ति बी एन श्रीकृष्णा (पूर्व न्यायाधीश उच्चतम न्यायालय), विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रोफेसर आर.के.द्विवेदी, डायरेक्टर, सी.डी.सी. सी.एस.जे.एम. विश्वविद्यालय, कानपुर, सेमिनार के समन्वयक एवं प्राचार्य प्रोफेसर अरुण कुमार दीक्षित, डी.ए-वी. कॉलेज, कानपुर के साथ इस राष्ट्रीय सेमिनार की आयोजन सचिव प्रोफेसर विनोद मोहन मिश्र मंचासीन हुए। कार्यक्रम की शुरुआत माननीय अतिथियों द्वारा सरस्वती जी के समक्ष दीप प्रज्वलन कर किया गया। सरस्वती वंदना की प्रस्तुति डॉ श्रुति श्रीवास्तव द्वारा की गई, तत्पश्चात अतिथियों का स्वागत उदबोधन प्रोफेसर अरुण कुमार दीक्षित, प्राचार्य डी.ए-वी. कॉलेज द्वारा किया गया। इस क्रम में संगोष्ठी से संबंधित संपादित पुस्तक “India’s Cyber Security: Challenges and Options” एवं स्मारिका का विमोचन सम्मानित मंच द्वारा किया गया। आयोजन सचिव प्रोफेसर विनोद मोहन मिश्र द्वारा इस राष्ट्रीय संगोष्ठी कॉन्सेप्ट नोट पढ़ा गया, जिसमें उन्होंने बताया की मनुष्य ने हमेशा प्राकृतिक प्रदेशों की खोज और विकास करने की कोशिश की है, जमीन पर बस्तियां बनाने से लेकर महासागरों में यात्रा करने तक, बाहरी अंतरिक्ष पर आक्रमण करने व जीतने के लिए हमेशा प्रयासरत रहा है। आज भारत, साइबर सुरक्षा के क्षेत्र मे अपनी शैशवावस्ता से युवावस्था की ओर बढ़ रहा है और इस क्षेत्र मे प्रगतिमान है। कीनोट ऐड्रेस मुख्य अतिथि माननीय न्यायमूर्ति बी एन श्रीकृष्णा द्वारा दिया गया। जिसमें उन्होंने बताया कि साइबर अपराधो की अधिकता होने के कारण विधि विज्ञान की भूमिका बढ़ जाती है, आज भारतीय दण्ड सहिता मे नए कानूनों की समाहित करने की आवश्यकता बढ़ रही है। सचिव, बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट, मैडम अनंता स्वरूप ने अपने उदबोधन मे महाविद्यालय परिवार को इस आयोजन की बधाई देते हुये सभी प्रतिभागियो को अपनी शुभकामनाए दी। अंत में संगोष्ठी के समन्वयक एवं प्राचार्य प्रोफेसर अरुण कुमार दीक्षित द्वारा सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया गया।
प्रथम तकनीकी सत्र अप्राहन 12:00 बजे महाविद्यालय के सभागार मे प्रारम्भ किया गया। मुख्य थीम “Need for strengthening India’s Cyber Security in Contemporary world” और “Cyber Security & Data Privacy : Emerging Issues and Challenges” पर आधारित इस तकनीकी सत्र की शुरुआत चेयर पर्सन माननीय न्यायमूर्ति बी एन श्रीकृष्णा द्वारा की गई। प्रमुख वक्ता डॉ. के.ए. पाण्डेय, सह– आचार्य, विधि विभाग, डॉ राम मनोहर लोहिया नेशनल लॉं विश्वविद्यालय, लखनऊ द्वारा बताया गया कि आज साइबर खतरा, राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गैर पारंपरिक खतरे का एक नया आयाम है। सूचना और संचार प्रौद्योगिकी ने मानव जीवन को इतनी तेजी से बदल दिया है कि कोई भी बिना कंप्यूटर के दैनिक जीवन की कल्पना नहीं कर सकता है। दूसरे मुख्य वक्ता के रूप मे डॉ अशोक पी वाडजे, कुलसचिव एवं सह आचार्य, विधि विभाग, महाराष्ट्र नेशनल लॉं विश्वविद्यालय, औरंगाबाद द्वारा बताया गया की तकनीकी रूप से संचालित और सूचना-आधारित समाज में, व्यक्तियों, व्यावसायिक उद्यमों और सरकारी मशीनरी के लिए तकनीक-प्रेमी और साइबरस्पेस के पारिस्थितिकी तंत्र से अच्छी तरह परिचित होना अनिवार्य है। इस तकनीकी सत्र में डॉ श्रवण कुमार त्रिपाठी, श्री अवनीश पांडे, डॉ अरविंद कुशवाहा (ऑनलाइन) सहित अनेक शोधर्थियों द्वारा संबंधित विषय पर शोध पत्र प्रस्तुत किए गए।
द्वितीय तकनीकी सत्र अप्राहन 3:00 बजे महाविद्यालय के सभागार मे प्रारम्भ किया गया। मुख्य थीम “Existing and Potential threats to India’s Cyber Security” और “The Future of Cyber and Information Technology in India” पर आधारित इस सत्र की अध्यक्षता प्रो. आर.के. द्विवेदी, डायरेक्टर, सी.डी.सी. सी.एस.जे.एम. विश्वविद्यालय, कानपुर द्वारा की गयी और बताया कि साइबर दुनिया कंप्यूटर और इंटरनेट के वैश्विक नेटवर्क से बना है। वास्तविक दुनिया के विपरीत, जिसकी सीमाएँ हैं, साइबरस्पेस एक आभासी स्थान है। साइबरस्पेस में प्रवेश करने और उपयोग करने के लिए दुनिया में कहीं से भी किसी का भी स्वागत है। क्योंकि साइबरस्पेस ब्रह्मांड इतना विशाल है, कोई भी या तो किसी और की पहचान मान सकता है या अपनी पहचान छुपाने के लिए इसका इस्तेमाल कर सकता है। इस कारण से हमें तत्काल आईटी अवसंरचना को सुरक्षित करने की आवश्यकता है। मुख्य वक्ता के रूप में डॉ बिश्व कल्याण दास, नेशनल फोरेंसिक्स साइनसेस विश्वविद्यालय, गांधीनगर, गुजरात द्वारा बताया की “गोपनीयता” की अवधारणा को परिभाषा के कठोर शब्दों में वर्णित करना बहुत कठिन है क्योंकि यह एक समकालीन अनुशासन है, इसलिए इसे एक आयामी दृष्टिकोण के रूप में नहीं समझा जा सकता है। निजता का अधिकार हर व्यक्ति के जीवन के साथ संपर्क, प्रारंभिक चरण में हमारे भारत के संविधान ने निजता के स्पष्ट अधिकार को मान्यता नहीं दी, बल्कि इसे एक सामूहिक अधिकार के रूप में रेखांकित किया है। दूसरे मुख्य वक्ता के रूप मे इंजी. हर्ष तोमर, इन्फोसिस लिमिटेड, बंगलुरु द्वारा बताया गया की भारत अपने बिजली ग्रिड, वित्तीय संस्थानों, एकीकृत पासपोर्ट पंजीकरण सेवाओं (आखिरी हमला 25 जुलाई को हुआ था), और नागरिकों की पहचान पर साइबर हमले सहित कई साइबर सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रहा है। वास्तव में, हाल ही में, विवाह पंजीकरण, मृत्यु और जन्म प्रमाण पत्र, भूमि रिकॉर्ड, और बिजली आपूर्ति सेवाओं जैसे सार्वजनिक सेवा से संबंधित साइबर सुरक्षा संरचना पर भी हमले हुए हैं। इस प्रकार के हमलों ने मुख्य रूप से चीन और अन्य देशों के संबंध में भारत की चिंताओं को बढ़ा दिया है जो साइबर सुरक्षा से संबंधित अपने स्वयं के मानदंड बनाने की कोशिश कर रहे हैं। भारत अपनी साइबर सुरक्षा रणनीति लाने के लिए काम कर रहा है और इसलिए वह सभी विकासशील देशों से इनपुट लेना चाहता है ताकि भविष्य की कार्ययोजना और खाका तय किया जा सके। इस तकनीकी सत्र में अंजली दीक्षित, सारिका श्रीवास्तव, अखिलेश मिश्र, राहुल वानखेड़े (ऑनलाइन) सहित अनेक शोधर्थियों द्वारा संबंधित थीम पर अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए।
इस अवसर पर विभागाध्यक्ष प्रो. निरंकार प्रसाद तिवारी,प्रो. पुष्पेंद्र कुमार त्रिपाठी, प्रॉक्टर रजत कुमार, प्रो. संध्या सिंह, प्रो. आर. बी. तिवारी, प्रो. डी. पी. राव, डा. रमा भाटिया, डा. अभय राज सिंह, डा. अमरेंद्र प्रताप गोंड, डा. अनिल सिंह, डा. विशाल श्रीवास्तव, डा. पंकज कुमार वर्मा सहित अन्य विश्वविद्यालयो एवं महाविद्यालयों के प्रोफेसर व शोधार्थी उपस्थिति रहे।
“India’s Cyber Security: Challenges and Options” के उद्घाटन सत्र का प्रारम्भ महाविद्यालय के सभागार मे


















