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विश्व ब्रेल दिवस पर लुई ब्रेल की मनाई जयंती

कानपुर। सक्षम कानपुर प्रांत द्वारा लुई ब्रेल जयंती का आयोजन कनिका हॉस्पिटल में मनाया गया। सक्षम संस्था के अध्यक्ष डॉ शरद बाजपेई ने बताया कि 4 जनवरी के दिन लुई ब्रेल का 1809 में फ्रांस के एक छोटे से कस्बे कुप्रे में जन्म हुआ था। लुई ब्रेल को एक ऐसे शख्स के रूप में याद किया जाता है, जिन्होंने खुद नेत्रहीन होने के बावजूद दृष्टिहीनों को पढ़ने-लिखने में सक्षम बनाने के लिए एक नया आविष्कार किया। जिसे ब्रेल लिपि कहा जाता है।
लुई ब्रेल जन्मजात नेत्रहीन नहीं थे। बचपन में एक हादसे में उनकी आंखों की रोशनी चली गई थी। लुई ब्रेल के पिता रेले ब्रेल शाही घोड़ों के लिए काठी बनाने का काम करते थे। 3 साल की उम्र में एक बार जब लुई अपने पिता के औजारों से खेल रहे थे तो एक औजार उनकी आंख में लग गया। जैसे-जैसे लुई बड़े होने लगे उनकी आंखों की चोट की तकलीफ बढ़ती गई। 8 साल का होते-होते लुई ब्रेल की आंखों की रोशनी पूरी तरह जा चुकी थी। इसी लिपि से लुई ब्रेल को नेत्रहीनों के लिए ब्रेल लिपि बनाने का विचार आया। उन्होंने ब्रेल लिपि में 12 की जगह केवल 6 बिंदुओं का प्रयोग कर 64 अक्षर और चिन्ह बनाए। साथ ही उन्होंने ब्रेल लिपि में विराम चिन्ह, गणितीय चिन्हों, संगीत के नोटेशन लिखने के लिए भी आवश्यक चिन्ह बनाए। इस तरह लुई ब्रेल ने 1825 में दुनिया भर के नेत्रहीनों के पढ़ने-लिखने में मददगार ब्रेल लिपि का आविष्कार किया था। कार्यक्रम में सक्षम कानपुर प्रांत के अध्यक्ष डॉ शरद बाजपेई, उपाध्यक्ष, आशुतोष बाजपाई, सचिव प्रशांत मिश्रा, जिला सचिव अभिषेक, कला प्रमुख योगेश बाजपेई, इमरान आदि उपस्थित रहे

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