राष्ट्रीय शर्करा संस्थान, कानपुर द्वारा चीनी मिलों के दूषित जल को साफ करने हेतु एक कम लागत की पर्यावरण मित्र तकनीक विकसित की गयी है। इस तकनीक में जलकुम्भी (जलीय खरपतवार) का प्रयोग फाइटो- रेमेडियेशन सिद्धान्त पर है। जिसमें वनस्पति एवं वृक्ष, दूषित जल से प्रदूषकों को अवशोषित कर जल साफ कर देते है संस्थान के भौतिक रसायन अनुभाग द्वारा विकसित की गयी तकनीक में जलकुम्भी (जलीय खरपतवार का प्रयोग दूषित जल के प्राथमिक शोधन हेतु किया गया है एवं यह देखा गया है कि उससे प्राप्त पानी को मल्टीग्रेड फिल्टर एवं पाउडर एक्टिव कार्बन के प्रयोग द्वारा उत्तम गुणवत्ता का बनाया जा सकता है। प्रयोगशाला में किये गये अनेकों श्रृंखलाबद्ध प्रयोगों में यह देखा गया कि जलकुम्भी (जलीय खरपतवार) का प्रयोग BOD, COD, नाइट्रोजन, सस्पेंडेड सॉलिड, कीटनाशकों और हैवी मेटल्स को दूर करने में प्रभावी है। श्रीमती नीलम चतुर्वेदी, रिसर्च फैलो ने बताया कि 7 दिनों के ट्रीटमेन्ट साइकल में हम दूषित जल से 90 प्रतिशत से अधिक BOD एवं COD कम करने में सक्षम हुये जो कि जलकुम्भी (जलीय खरपतवार) के द्वारा शोधन की दक्षता को प्रदर्शित करता है डॉ. सुधांशु मोहन, वैज्ञानिक अधिकारी (भौतिक रसायन) ने बताया कि चूंकि चीनी मिल के दूषित जल को शोधित करने की वर्तमान तकनीकों को लागू करने और शोधन में खर्चा अधिक होता है। अतः संस्थान एक कम लागत की यूज़र फ्रेण्डली तकनीक पर गत 5 वर्षों से काम कर रहा था जलकुम्भी (जलीय खरपतवार) पर आधारित यह तकनीक की न केवल लागत कम है अपितु प्रचलित तकनीकों की अपेक्षा ऊर्जा एवं अन्य केमिकल इत्यादि का व्यय कम होने के कारण इससे दूषित जल का शोधन करने में खर्चा बहुत कम होना संभावित है। जलकुम्भी (जलीय खरपतवार) के शोधन से प्राप्त पानी को मल्टीग्रेड एवं कार्बन फिल्टर से और साफ करके इसे सिंचाई एवं चीनी मिलों में ही विभिन्न उपयोगों में लाने के सफल प्रयोग संस्थान द्वारा किये गये संस्थान के निदेशक श्री नरेंद्र मोहन ने बताया कि हम इस पूरी तकनीक में रिवर्स ऑस्मोसिस तकनीक का समावेश कर प्राप्त पानी को पीने योग्य भी बना सकते हैं। इस तकनीक का विकास चीनी मिलों के दूषित जल को कम लागत में साफ करने और इसे पुनः प्रयोग में लाने योग्य बनाने में सहायक होगा एवं पानी के पुनः प्रयोग में लाने से ताजे पानी की खपत कम करना संभव होगा इस तकनीक के विकास में कार्यरत श्रीमती नीलम चतुर्वेदी, रिसर्च फैलो ने बताया कि हम इस तकनीकी और जलकुम्भी (जलीय खरपतवार) के प्रयोग के उपरान्त उनके निस्तारण में अपना अनुसन्धान कार्य जारी रखेंगे क्योंकि इस जलकुम्भी (जलीय खरपतवार) का प्रयोग खाद एवं उच्च प्रोटीन वाले पशु आहार के रूप में भी किया जाना सम्भव है।


















