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मकर संक्रांति के दिन श्रद्धालुओं ने गंगा में लगाई आस्था की डुबकी

मकर संक्रांति का पर्व इस बार दो दिन मनाया जा रहा है। कई लोगों ने 14 जनवरी को दान-पुण्य किया। वहीं, अधिकांश लोगों ने रविवार को पर्व मनाया। वैसे तो संक्रांति शनिवार की रात से लग गई। मगर कहा जाता है कि सूर्य अस्त के बाद यदि ग्रह बदलते हैं, तो त्योहार सूर्योदय के बाद माना जाता है।

आपको बताते चलें कि, रविवार को श्रद्धालुओं ने गंगा में आस्था की डुबकी लगाई। इस दौरान घाटों पर हर हर गंगे की गूंज सुनाई दी। वहीं, बिठूर, जाजमऊ, परमट, सरसैया घाट , ड्योढ़ी घाट आदि गंगा तटों पर भक्तों की भीड़ को लेकर विशेष इंतजाम किए गए। घाटों पर पुलिस बल, तैराकों को भी तैनात किया गया। बताते चलें कि, गंगा स्नान के बाद लोगों ने शहर के कई इलाकों में खिचडी वितरित की। इसके साथ ही तिल के साथ-साथ गुड़ का दान भी किया गया। वहीं, पुरोहितों के अनुसार, काले तिल का दान करने से शनि का दोष दूर होता है। इसलिए तिल का दान मकर संक्रांति पर अवश्य किया जाता है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार,मकर संक्रांति के दिन दान पुण्य और गंगा स्नान का अधिक महत्व है।

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