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पद्मश्री गिरिराज किशोर जी अंतरराष्ट्रीय हिंदी जगत के पुरोधा थे

कानपुर, गांधी शांति प्रतिष्ठान केंद्र के तत्वाधान में अंतरराष्ट्रीय हिंदी जगत के पुरोधा पद्मश्री डॉ गिरिराज किशोर की पुण्यतिथि का कार्यक्रम हरिहर नाथ शास्त्री भवन खलासी लाइन में उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए वक्ताओं ने कहा कि डॉ गिरिराज किशोर जी हिंदी जगत के एक अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त लेखक थे अपनी सृजन शीलता के बल पर यश के शिखर पर स्थापित गिरिराज जी की सहजता और उत्साह उनके व्यक्तित्व का विशिष्ट पहलू है गिरिराज का जन्म 8 जुलाई 1937 को मुजफ्फरनगर में एक संपन्न जिमीदार परिवार में हुआ था उत्तर प्रदेश सरकार ने कुछ समय कार्य करने के पश्चात् स्वतंत्र लेखन किया तदुपरांत कानपुर विश्वविद्यालय में कुलसचिव के पद पर काम करने के बाद कानपुर आई.आई.टी में कुलसचिव के पद पर नियुक्त हुए और बाद में आई.आई.टी.में ही रचनात्मक लेखन केंद्र के अध्यक्ष रहे गिरिराज जी विधाओं की सीमा से परे अपनी सृजनात्मक क्षमता से अपने आसपास रहे से दुनियाँवि सच को अभिव्यक्त करने में सिद्धस्त एक बहुआयामी प्रतिभा के धनी लेखक रहे हैं! संचालन संयोजक सुरेश गुप्ता ने किया कार्यक्रम में प्रमुख रुप से मोहम्मद उस्मान, डॉक्टर सुहेल नौशाद आलम मंसूरी प्रदीप यादव डा खान फारुख आनंद शुक्ला उमाकांत प्रताप साहनी श्याम बिंदा शशि कौशिक ओमेंद्र भारत देव कुमार एसबी सिंह विनय सिंह श्रीमती किरण गुप्ता कुमारी प्रिया यादव आदि प्रमुख थे!

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