जीवन में कन्यादान से बड़ा कोई दान नहीं : सुनील शुक्ला
— बागेश्वर धाम में महा शिवरात्रि को संपन्न होगा 121 कन्याओं का विवाह समारोह….
— कानपुर में शीघ्र होगी बागेश्वर धाम सरकार की श्री रामकथा हेतु दिया निमंत्रण – गुरुदेव ने जताई सहमति ….
– महाशिवरात्रि पर बागेश्वर धाम में सामूहिक विवाह में एक कन्या विवाह की जिम्मेदारी उठायेंगे सुनील शुक्ला …..
कानपुर 13 फरवरी । हिंदू धर्म में दान देने का बड़ा महत्व बताया गया है। ऐसी मान्यता है कि दान देने से व्यक्ति को पुण्य की प्राप्ति होती है। और साथ ही इस लोक के बाद परलोक में भी कल्याण होता है। मनुष्य के जीवन में 5 दानों को श्रेष्ठ माना गया है जिनमे भूमि दान, गौदान, विद्या दान,अन्न दान ,और सर्व श्रेष्ठ कन्या दान को माना गया है ।
यह जानकारी देते हुए राष्ट्रीय गौरक्षा वाहिनी गौसेवा संघ के राष्ट्रीय महामंत्री सुनील शुक्ला ने कही उन्होंने वार्ता के माध्यम से जानकारी देते हुए बताया की आगामी 18 फरवरी छतरपुर मध्यप्रदेश स्थित विश्व प्रसिद्ध बागेश्वर धाम में आयोजित होने वाले 121 कन्याओं के सामूहिक विवाह महोत्सव में 1 कन्या के विवाह की जिम्मेदारी लेते हुए अपनी सहभागिता को सौभाग्य सूचक मानते हुए कही श्री सुनील शुक्ला ने बताया की रविवार को बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर “गुरुदेव धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री” जी के मुलाकात कर उन्हें इस पुण्य कार्य में शिरकत करने का मौका प्राप्त हुआ जिसमे वे खुद को परम सौभाग्यशाली मानते है । साथ ही श्री शुक्ला ने अंतर्राष्ट्रीय श्रीराम कथा वाचक गुरुदेव धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री से उनके श्री मुख द्वारा कानपुर में श्रीराम कथा करवाने का आमंत्रण भी दिया जिसपर गुरुदेव धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री महाराज ने अपनी सहमति भी देदी है । जिसकी औपचारिक जानकारी देते हुए श्री शुक्ला ने बताया की अभी तारीख सुनिश्चित नही हुई है पर शीघ्र ही कानपुर वासियों के लिए यह खुशी की खबर है की शीघ्र ही बागेश्वर धाम सरकार द्वारा उनके श्री मुख से राम कथा का अमृत रसपान कानपुर वासियों को भी मिलेगा । श्री शुक्ला ने बागेश्वर धाम सरकार से मुलाकात के दौरान उनके आदेश पर 121 कन्या विवाह समारोह में खुद पर एक कन्या के विवाह की जिम्मेदारी ली है एवम 18 फरवरी को महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर उक्त कार्यक्रम में शिरकत भी करेंगे ।उन्होंने कहा की शास्त्रों में कन्या दान को महादान कहा जाता है। सनातन धर्म में कन्या दान को सर्वोत्तम माना गया है। यह दान कन्या के माता-पिता द्वारा उसके विवाह संस्कार पर किया जाता है। इस दान में माता-पिता अपनी पुत्री का हाथ वर के हाथ में रखते हुए संकल्प लेते हैं। और उसकी समस्त जिम्मेदारियां “वर ” को सौंप देते हैं। जिन माता-पिता को कन्यादान का सौभाग्य प्राप्त नही हो पाता है उनके लिए इससे बड़ा पुण्य अवसर इस धरती पर कुछ भी नहीं हो सकता है। मनुष्य के जीवन में किया कन्या दान मोक्ष की प्राप्ति एवं मरणोपरांत स्वर्ग का रास्ता भी खोल देता है। बाबा बागेश्वर की धरती पर इस परम सौभाग्य कार्य को संपादित किया जारहा है जो की हम सभी के लिए इस महापुण्य कार्य में शिरकत करने का स्वर्णिम अवसर है । इस अवसर पर मुख्य रूप से राष्ट्रीय गौरक्षा वाहिनी गौसेवा संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजीव सिंह सेंगर , राष्ट्रीय महामंत्री सुनील शुक्ला, आकाश त्रिपाठी ,अनिल जोशी ,पंडित कमल मिश्रा सहित गौरक्षा वाहिनी के सक्रिय सदस्य गण आदि मौजूद रहे ।


















