होलिका जलते ही अबीर गुलाल लगाकर दी गई और लोगों को शुभकामनाएं । वही आपको बताते चले कि कोतवाली बाबू पुरवा में पिछले 30 वर्षों से लगातार होलिका दहन का कार्यक्रम होता चला आ रहा है। होलिका दहन की शुरुआत कानपुर बार एसोसिएशन के पूर्व मंत्री अभिषेक पांडे ने की थी समय का अभाव होने के कारण यह चालू की गई परंपरा को पुलिस विभाग की नौकरी कर रहे शैलेन्द्र कुमार लगातार पिछले 10 वर्षों से नौकरी से समय निकालकर होलिका को सजाने का काम करते है। शैलेंद्र कुमार ने बताया कि होली पर्व पर होलिका को सजाने और सवारने का पूरा काम मेरे और छोटे बच्चों के लगने से पूरा होता है। और इस काम में मेरा मन और भी लगता है कि इसमें हमारे बड़े/बुजुर्गों की यादें जुड़ी है आज बहुत से लोग समय रहते इस पर्व पर एक साथ नहीं मिल पाते हैं लेकिन किसी ना किसी माध्यम से उन तक होलिका के सजने की सूचना मिलने पर उन सभी लोगों को खुशी मिलती है की आपके द्वारा चालू की गई परंपरा को आज भी उसी ऊर्जा के साथ चालू रखा गया है। इस होलिका दहन को सजाने और संवारने में प्रमुख रूप से निहाल सिंह,शिवम यादव, अथर्व,डुग्गु,अंश,रुद्रेश आदि छोटे बच्चे उपस्थित रहते है।
मंगलवार होने की वजह से शहर के कोतवाली बाबू पुरवा में होली 12 बजे के बाद जलाई गई


















