कानपुर
होली के बाद शीतला अष्टमी मनाई जाती है,,,इसे कहीं-कहीं पर बसिऔरा पूजा भी कहते हैं,,,इस दिन बासी खाना खाए जाने का काफी महत्व है, और बासी खाने का ही भोग भी लगाया जाता है,,, इस दिन शीतला माता की पूजा करने से कई प्रकार की बीमारियों में लाभ प्राप्त होता है,,,
माना जाता है कि इस दिन माता शीतला की पूजा करने से वे महामारी से लोगों की रक्षा करती है,,,हर जगह इस पूजा का दिन और परम्पराएं अलग-अलग है,,,
मान्यता के अनुसार, शीतला अष्टमी व्रत के दौरान घर में ताजा भोजन नहीं पकाया जाता है, बल्कि एक दिन पहले यानी शीतला सप्तमी के दिन बनाए गए भोजन को ही प्रसाद के रूप में खाया जाता है,,,,इस परंपरा के पीछे सिर्फ धार्मिक ही नहीं बल्कि वैज्ञानिक महत्व भी है,,,।


















