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29वाँ अखिल भारतीय कवि सम्मेलन सम्मान समारोह

कानपुर । अनमोलरत्न सेवा संस्थान द्वारा हिन्दी पखवारा एवं पं0 दीनदयाल उपाध्याय जन्म जयन्ती के अवसर पर 29वाँ अखिल भारतीय कवि सम्मेलन सम्मान समारोह मर्चेन्ट चेम्बर, सिविल लाइन्स कानपुर में आयोजित हुआ। सर्वप्रथम माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यापर्ण और दीप प्रज्जवलन गणेश प्रसाद गुप्ता (मयूर ग्रुप) ने किया। उसके पश्चात समारोह के स्वागताध्यक्ष अमरनाथ मेहरोत्रा अध्यक्ष श्री रामगोपाल तुलस्यान, कार्यक्रम संयोजक संस्था सचिव डा० राधेश्याम मिश्र ने आगत अतिथियों, मुख्य अतिथि सत्यदेव पचौरी एवं अति विशिष्ट अतिथियों अवध पाल सिंह यादव, सलिल विश्नोई, नीलिमा कटियार,सुरेन्द्र मैथानी को शाल व प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया। देश के सुप्रसिद्ध गीतकार सोम ठाकुर, सम्मानित अतिथि अजय मिश्र, प्रेम नारायन सोमानी, स्वागताध्यक्ष अमरनाथ मेहरोत्रा समारोह अध्यक्ष डॉ० उमेश पालीवाल संस्थाध्यक्ष राम गोपाल तुलस्यान, संस्था सचिव डॉ० राधेश्याम मिश्र ने श्याम प्रकाश देवपुरा (राजस्थान), ओम प्रकाश प्रजापति, (टू मीडिया चैनल), मफत लाल अग्रवाल, जितेन्द्र पाल सिंह, राजेश शर्मा, आर0एन0 मिश्र एडवोकेट, विशाल अग्रवाल, डा० आर०के० अग्निहोत्री, धर्म प्रकाश गुप्ता, अशीष चान्दना, अमित अग्रवाल, डा0 वी०एन० अचार्या, गोपाल तुलस्यान, अनिल शरन गर्ग, रमेश चन्द्र गर्ग, नारेन्द्र ओमर, हरीओम तुलस्याम, मनीष जाखोदिया, उमेश मिश्र, सिद्धगोपाल प्रभाकर, डा० सुषमा त्रिपाठी, डा० राधा शाक्या, रजीव मिश्रा, गोपी ओमर ने प्रतीक, चिन्ह, माला, उत्तरीय, भेंट कर सम्मानित किया। मुख्य अतिथि सत्यदेव पचौरी ने अपने उदबोधन में कहा कि साहित्य समाज का दर्पण है। कविता हमेशा समाज को जोड़ने का काम करती है। अतिथि विशिष्ट अतिथि अवध पाल सिंह यादव साहित्य एवं आध्यात्म पर विचार व्यक्त किया। सलिल विश्नोई, नीलिमा कटियार, सुरेन्द्र मैथनी ने भी विचार व्यक्त किये कवि सम्मेलन का शुभारम्भ माँ वाणी की वंदना से देश की सुप्रसिद्ध कवियित्री योग्यता चौहान ने किया और आगे गीत पढ़ते हुए कहा है बिना कारण ही होठों पर मृदु मुस्कान मेरे आलमारी से निकालूँ नित नए परिधान मेरे अन्तराष्ट्रीय कवयित्री डॉ० कीर्ति ‘काले’ ने पढ़ते हुए कहा जो सरहद पर जान की बाजी लगा गए। खुद सोए लेकिन औरो को जगा गए। देश के सुप्रसिद्ध गीतकार कार्यक्रम संयोजक डॉ० राधेश्याम मिश्र इस प्रकार अपने गीत को पढ़ा जो दुनिया का सिरजन हारा वही तुम्हारा एक सहारा संगी साथी जो भी तेरे है मतलबी स्वार्थी घेरे अन्तरराष्ट्रीय गीतकार डॉ० सोम ठाकुर ने पढ़ा मेरे भारत की माटी है चंदन और अबीर’। झाँसी से पधारी डॉ० सुमन मिश्रा ने पढ़ा जब से देखा रूप तुम्हारा वैरागी मन डोल गया। बैंगलोर से पधारे डॉ० ज्ञानचन्द्र मर्मज्ञ ने इस प्रकार सुनाया सत्य को लिखने चला तो लेखनी घबरा गई।

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