पैगम्बर मोहम्मद साहब के जन्मदिन से एक रात पहले पूरा कानपुर रोशनी से जगमगा उठा। जश्न की रात में लोगों ने मोहम्मद साहब को याद किया और उनके बताए रास्तों पर चलने का पैगाम दिया गया इस मौके पर नात शरीफ और कुरान ख़वानी)का भी आयोजन किया गया
बृहस्पतिवार पैगम्बर-ए-इस्लाम के जन्मदिन पर 12 रबीउल अव्वल के मुबारक मौके पर कानपुर से ऐतिहासिक जुलूस-
जुलूस ए-मोहम्मदी निकाला जाएगा जमीयत उलेमा ए हिन्द इसकी अगुवाई करेगी परेड ग्राउंड से झंडी दिखाकर इस रवाना किया जाएगा इसमें 250 से अधिक अंजुमनों के अलावा करीब साढ़े चार लाख से 5 लाख लोग जुलूस में शामिल होंगे
कानपुर के इस जुलूस-ए-मोहम्मदी को एशिया का सबसे बड़ा जुलूस माना गया है। परेड से उठकर शहर के विभिन्न रास्तो से होता हुआ फूलबाग में जाकर खत्म होता है इस जुलूस की शुरुआत अंग्रेजों के खिलाफ आवाज उठाने से हुई थी जिसमें हिंदू मुस्लिम समेत सभी धर्म के लोगों ने हिस्सा लिया था अब भी से जुलूस ए मोहम्मदी में सभी धर्म के लोग शामिल होते हैं आज की रात जश्ने चिराग के रूप में मनाई जाती है और पूरे शहर भर को रंगीन रोशनी से सजा दिया जाता है


















