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सुहागिन महिलाओं ने अपने पति के दीघायु के लिए संपन्न किया करवा चौथ का व्रत

करवा चौथ का व्रत सुहागानियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण  माना जाता है पौराणिक मान्यता के अनुसार करवा चौथ व्रत रखने की परंपरा महाभारत काल से चली आ रही है जब पांडवों पर संकट आया था श्री कृष्ण के कथन के अनुसार द्रौपदी ने करवा चौथ का व्रत पूजन किया था जिसके फल स्वरुप पांडवों पर आया संकट टल गया था   मान्यता ऐसे है कि जो सुहागिन स्त्रियां इस दिन अन्य जल का त्याग कर सच्चे मन से इस व्रत का पूजन अर्चन करती हैं उसके सुहाग पर कभी कोई विपदा नहीं आती है इस बार करवा चौथ व्रत का समय सुबह 6:36 से रात 8:26 तक पड़ा है पूजा का मुहूर्त शाम 5:44 से रात 7:00 तक रहा और चांद निकलने का समय रात 8:26 रहा है इस व्रत से करवा का विशेष महत्व होता है इस इस दिन चांद का दीदार करते हुए करवा से ही चंद्रमा को अर्थ दिया जाता है कहते हैं कि इसके बिना व्रत अधूरा माना जाता है

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