कानपुर। दीवाली से पहले धनतेरस के पर्व को खास अंदाज में मनाया जाता है। मंगलवार को पूरे देश में धनतेरस का पर्व बड़े ही धूमधाम से मनाया गया। कानपुर में धनतेरस के अवसर पर परमट स्थित महालक्ष्मी मंदिर को नोटों से सजाया जाता है। महालक्ष्मी मंदिर का श्रंगार नोटों से किया जाता है। पूरे मंदिर परिसर को सजाने में 7 लाख 50 हजार नोटों का इस्तेमाल किया गया है। इसमें 10 से लेकर 500 के नोटों को लगाया गया है। जिसकी वजह से यह मंदिर आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
कानपुर के सुप्रसिद्ध मंदिर में महालक्ष्मी अपने भक्तों के चेहरे में खुशियां और सुकून ला रही हैं। मंदिर का श्रंगार जिस अंदाज में किया गया है, वो किसी अद्भुत चमत्कार से कम नहीं है। देश के किसी हिस्से में ऐसा अद्भुत नजारा देखने को नहीं मिलेगा। हिंदू समाज में दीपावली के पर्व का खास महत्व है। दीवाली के दिन गणेश- लक्ष्मी को विराजमान किया जाता है। इसके बाद पूजा- अर्चना कर घरों में रोशनी की जाती है। इस लिए धन वर्षा करने वाली महादेवी महालक्ष्मी मंदिर के प्रांगण को नोटों से सजाया गया है।
मंदिर के पुजारी जितेंद्र मोहन बाजपेई ने बताया कि पूर्व के भांति ही महालक्ष्मी मंदिर का श्रृंगार नोटों से किया गया है। मां जैसी प्रेरणा देती हैं, हम उसी आधार पर काम करते हैं। इस कलयुग में लक्ष्मी जी को सब की जरूरत है। यदि लक्ष्मी नहीं हैं, तो कुछ नहीं है। धनतेरस में नोटों का श्रंगार किया जाता है। भक्तों की जिस प्रकार इच्छा होती है, उसी प्रकार मां श्रंगार किया जाता है। खजाना बटता है, श्री लक्ष्मी यंत्र दिया जाता है। पुजारी जितेंद्र मोहन बाजपेई ने बताया कि इस बार 7 लाख 50 हजार के नोटों का श्रृंगार किया गया है। महालक्ष्मी मंदिर का नोटों से श्रृंगार पिछले 2007 से चल रहा है। मां के आर्शीवाद से हर वर्ष श्रंगार में नोटों की संख्या बढ़ती जा रही है। कानपुर के आलावा दिल्ली-मुंबई से भी लोग महालक्ष्मी के दर्शन करने के लिए आते हैं। इसमें सबसे ज्यादा व्यापारी वर्ग के आते हैं। मंदिर के इतिहास की बात की जाए तो महालक्ष्मी का मंदिर आंनदेश्वर धाम में स्थापित है। यहां महालक्ष्मी मां, भगवान शंकर और राधा-कृष्ण की पूजा अर्चना की जाती है।
परमट के महालक्ष्मी मंदिर को 7 लाख 50 हजार के नोटों से सजाया


















