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बौद्ध महिलाओं ने लावारिश शवों को दिया कन्धा, ‘इंसानियत का नाता जोड़ो’ का संदेश गूंजा

समाज कल्याण सेवा समिति के ‘कन्धादान अभियान’ का समापन

कानपुर-समाज कल्याण सेवा समिति द्वारा आयोजित पाँच दिवसीय ‘लावारिस शवों को कन्धादान अभियान’ का गुरुवार को भावुक माहौल में समापन हुआ अभियान के अंतिम दिन बौद्ध समुदाय की महिलाओं ने इंसानियत की मिसाल पेश करते हुए बढ़-चढ़कर शवों को कन्धा दिया, जो समाज में जाति-धर्म की बेड़ियों को तोड़ने का सशक्त संदेश था पोस्टमार्टम हाउस से लेकर अंतिम संस्कार स्थल तक शव यात्रा में शामिल लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा इस दौरान कन्धा दानियों में महिलाओं की उपस्थिति उल्लेखनीय रही, जहाँ वे एक-दूसरे से कन्धा बदलते हुए नजर आईं। बिछड़े दुखी परिजनों की आत्मा की शांति के लिए तथागत गौतम बुद्ध और ईश्वर से प्रार्थना की गई पुरुषों द्वारा शवों पर फूलों की वर्षा की गई, जिसके चलते पोस्टमार्टम से एक किलोमीटर की दूरी तक सड़क फूलों से पटी रही। यह दृश्य लोगों को भावुक कर गया ‘बुद्धम् शरणम् गच्छामि’ के उद्घोष के साथ विदाई शव यात्रा के दौरान सभी मानव मात्र की एकता का संदेश देते हुए, लोग सामूहिक रूप से “हे मानव तू मुख से बोल बुद्धम् शरणम् गच्छामि, धम्मम् शरणम् गच्छामि, संघम् शरणम् गच्छामि” का उच्चारण करते हुए लावारिस शवों को अंतिम विदाई दे रहे थे। यह दृश्य मानवीय संवेदना और धार्मिक सौहार्द की अद्भुत मिसाल पेश कर रहा था इस मौके पर शव यात्रा में शामिल लोगों को संबोधित करते हुए समिति के सचिव, धनीराम पैंथर ने इस मुहिम के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह अभियान सभी धर्मों के लोगों की भागीदारी से सफल हो रहा है उन्होंने ज़ोर देकर कहा, “हमारा मकसद यही है कि जाति धर्म का बन्धन तोड़ो, इन्सानियत से नाता जोड़ो।”धनीराम पैंथर ने बताया कि समिति विगत 17 वर्षों से गंगा को प्रदूषण से बचाने के लिए भी सक्रिय रूप से कार्य कर रही है उन्होंने महत्वपूर्ण जानकारी देते हुए बताया कि अब तक 16,700 लावारिस शवों का ससम्मान अंतिम संस्कार कराया जा चुका है उन्होंने कहा, “अगर हमने इस मुहिम को न चलाया होता, तो इतनी लाशों को गंगा में बहाया जाता और गंगा को प्रदूषित किया गया होता।” उन्होंने सभी से अपील करते हुए कहा कि “आइये हम सब मिलकर इस मुहिम को और साकार रूप में अग्रसर करने का बीड़ा उठाये

देवेश तिवारी की रिपोर्ट

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