कानपुर। विश्व स्तनपान सप्ताह के अवसर पर आरोग्य धाम, ग्वालटोली में माताओं को स्तनपान के महत्व के बारे में जागरूक किया गया। वरिष्ठ होम्योपैथिक फिजिशियन डॉ. हेमंत मोहन और डॉ. आरती मोहन ने कहा कि मां का दूध बच्चे का जन्म सिद्ध अधिकार है और यह बच्चे का प्रथम वैक्सीनेशन है।
डॉक्टरों ने बताया कि मां का दूध बच्चे के शरीर की इम्यून सिस्टम और प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है। इससे बच्चे स्वस्थ, जागरूक और दिमाग से तेज होते हैं। मां का दूध पिलाने से माताओं के स्तन में गांठ बनने का खतरा भी कम होता है और इससे शरीर की फिगर भी नहीं बिगड़ती।
डॉ. आरती मोहन ने कहा कि कई माताएं यह सोचकर बच्चों को दूध पिलाने में हिचकिचाती हैं कि इससे उनका फिगर खराब हो जाएगा, लेकिन यह गलत धारणा है। जब मां अपने बच्चे को दूध पिलाती है तो बच्चे के प्रति मातृत्व प्रेम भी बढ़ता है।
उन्होंने बताया कि मां के दूध में सभी प्रकार के विटामिन, एंजाइम और प्रोटीन होते हैं। जो बच्चे शुरुआती 8 महीने में मां के दूध से वंचित रह जाते हैं, उन्हें आगे चलकर कई शारीरिक व मानसिक बीमारियां हो सकती हैं। जिन माताओं के स्तन से दूध नहीं आता, वे होम्योपैथिक दवा _Lac Defloratum_ और _Ricinus Communis_ का सेवन कर सकती हैं।
बदलते मौसम में डायरिया और उल्टी से पीड़ित बच्चों के लिए डॉक्टरों ने सलाह दी कि मां के दूध के साथ-साथ ORS का सेवन अवश्य कराएं।
देवेश तिवारी की रिपोर्ट


















