कानपुर: स्तनपान सप्ताह के अंतर्गत तीसरे दिन यूआईएसईएमएच, कानपुर के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग द्वारा स्तनपान के महत्व के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य माताओं एवं आमजन को शिशु के लिए स्तनपान के महत्व, इसके लाभ तथा स्तनपान से जुड़ी भ्रांतियों के प्रति जागरूक करना रहा।
प्रोफेसर डॉ. नीना गुप्ता द्वारा स्तनपान विषय पर इंटरैक्टिव टॉक एवं जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विशेष अतिथि वरिष्ठ परामर्शदाता डॉ. किरण सिन्हा और डॉ. रोली श्रीवास्तव की गरिमामयी उपस्थिति रही।
कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि “मां का दूध शिशु के लिए सर्वोत्तम आहार है” और स्तनपान को बढ़ावा देना केवल मां की नहीं, बल्कि पूरे परिवार एवं समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम के दौरान विभागाध्यक्ष एवं प्रोफेसर डॉ. सीमा द्विवेदी ने स्तनपान से मां को होने वाले विभिन्न स्वास्थ्य लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि स्तनपान मां और शिशु दोनों के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी है। साथ ही उन्होंने कोलोस्ट्रम (खीस/पीला गाढ़ा दूध) के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि जन्म के बाद निकलने वाला यह पहला दूध पोषक तत्वों एवं रोग प्रतिरोधक तत्वों से भरपूर होता है और नवजात शिशु के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
प्रोफेसर डॉ. शैली अग्रवाल ने माताओं को स्तनपान कराने की सही तकनीक एवं उचित स्थिति के बारे में जानकारी दी। उन्होंने स्तनपान कराने वाली माताओं में होने वाली सामान्य समस्याओं, जैसे बुखार, स्तनों में अत्यधिक दूध भर जाना (Breast Engorgement) तथा स्तन में संक्रमण एवं फोड़ा (Breast Abscess) के कारणों, लक्षणों एवं उनसे बचाव के उपायों के बारे में भी बताया।
वरिष्ठ परामर्शदाता डॉ. किरण सिन्हा ने स्तनपान से जुड़े महत्वपूर्ण मिथकों एवं भ्रांतियों को दूर करते हुए बताया कि स्तनपान को गर्भनिरोधक का रोल बताया। जन्म के तुरंत बाद स्तनपान शुरू करने, छह माह तक केवल स्तनपान कराने तथा मां एवं शिशु दोनों के स्वास्थ्य पर इसके सकारात्मक प्रभावों के बारे में जानकारी दी।उन्होंने यह भी बताया कि स्तनपान कराने से मां में स्तन कैंसर के जोखिम को कम करने में मदद मिलती है।
डॉ. रोली श्रीवास्तवने स्तन के दूध को शिशु का “पहला टीका (First Vaccine)” बताते हुए कहा कि मां का दूध शिशु को संक्रमणों से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने जोर दिया कि स्तनपान कराने वाली मां के स्वास्थ्य एवं पोषण का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है। मां को संतुलित एवं पौष्टिक संपूर्ण आहार दिया जाना चाहिए, ताकि मां एवं शिशु दोनों का स्वास्थ्य बेहतर बना रहे।
इस कार्यक्रम की समन्वयक सहायक प्रोफेसर डॉ. मीनाक्षी शर्मा एवं डॉ. भारती शर्मा रहीं, जबकि कार्यक्रम की मुख्य आयोजक एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. प्रतिमा वर्मा रहीं।
कार्यक्रम में लगभग 100 लोगों, जिनमें स्तनपान कराने वाली माताएं भी शामिल थीं, ने सहभागिता की। कार्यक्रम में डॉ. बंदना शर्मा, डॉ. श्रुति गुप्ता, डॉ. पविका लाल, डॉ. गरिमा गुप्ता, डॉ. दिव्या द्विवेदी, डॉ. रश्मि गुप्ता, डॉ. उरूज जहां एवं डॉ. रश्मि यादव सहित विभाग के अन्य चिकित्सकों ने भी सक्रिय सहभागिता की। सीनियर रेजिडेंट्स एवं जूनियर रेजिडेंट्स ने भी कार्यक्रम के सफल आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई ।
जन-जागरूकता को प्रभावी एवं रोचक बनाने के लिए फाइनल ईयर एमबीबीएस विद्यार्थियों द्वारा एक विशेष नुक्कड़ नाटक/स्किट भी प्रस्तुत किया गया। स्किट के माध्यम से स्तनपान से जुड़ी सामाजिक भ्रांतियों, परिवार की भूमिका तथा मां और शिशु के लिए स्तनपान के महत्व को सरल एवं प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत किया गया। विद्यार्थियों की प्रस्तुति को उपस्थित लोगों द्वारा सराहा गया।]
देवेश तिवारी की रिपोर्ट


















