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शेरशाह सूरी की ग्रैंड ट्रंक रोड से आधुनिक NHAI कॉरिडोर तक: बदलते भारत की विकास यात्रा

 

करीब 500 वर्ष पहले शेरशाह सूरी ने जिस ग्रैंड ट्रंक रोड (GT Road) का निर्माण कराया था, वह भारत की सबसे ऐतिहासिक सड़कों में से एक है। उस दौर में इसका उद्देश्य व्यापार, प्रशासन और लोगों के आवागमन को सुगम बनाना था। बाद में अंग्रेजों ने इसी सड़क को सेना की आवाजाही और सामान की ढुलाई के लिए और अधिक विकसित किया।
आजादी के बाद इस ऐतिहासिक मार्ग ने आधुनिक भारत के विकास की नई कहानी लिखनी शुरू की। समय के साथ ग्रैंड ट्रंक रोड के बड़े हिस्से को राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क में शामिल किया गया। आज इसका प्रमुख भाग नेशनल हाईवे-19 (NH-19) के रूप में विकसित है, जिसकी देखरेख और आधुनिकीकरण का कार्य भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) कर रहा है।
उत्तर प्रदेश में कानपुर से प्रयागराज और वहां से आगे वाराणसी तक जाने वाला NH-19 इसी ऐतिहासिक ग्रैंड ट्रंक रोड का आधुनिक स्वरूप है। यह मार्ग आगे बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल को भी जोड़ता है, जिससे पूर्वी भारत की आर्थिक गतिविधियों को गति मिलती है।
NHAI द्वारा इस कॉरिडोर को फोर लेन और सिक्स लेन में विकसित करने, बेहतर फ्लाईओवर, अंडरपास, सर्विस रोड, आधुनिक टोल प्लाज़ा, रिफ्लेक्टर, रोड सेफ्टी उपायों और स्मार्ट ट्रैफिक प्रबंधन जैसी सुविधाओं से सुसज्जित किया गया है। इससे यात्रा का समय कम हुआ है, सड़क सुरक्षा में सुधार आया है और माल परिवहन अधिक तेज़ एवं सुगम हुआ है।
कानपुर–प्रयागराज कॉरिडोर आज केवल एक सड़क नहीं, बल्कि किसानों, व्यापारियों, उद्योगों, छात्रों और लाखों यात्रियों के लिए विकास की जीवनरेखा बन चुका है। कृषि उत्पाद तेजी से मंडियों तक पहुंच रहे हैं, उद्योगों की सप्लाई चेन मजबूत हुई है और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिली है।
शेरशाह सूरी की ऐतिहासिक सड़क से शुरू हुई यह यात्रा आज NHAI के आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ “विरासत से विकास” की मिसाल बन चुकी है। यह दर्शाती है कि कैसे सदियों पुराना मार्ग आज भी भारत की प्रगति, कनेक्टिविटी और आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव बना हुआ है।]

देवेश तिवारी की रिपोर्ट

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