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विमुक्त घुमन्तू जनजाति ने अधिकारों के लिए बनाई रणनीति

 

कानपुर । विमुक्त घुमंतू जनजाति विकास परिषद अभा के ‘राष्ट्रीय बौद्धिक प्रकोष्ठ’ के तत्वाधान में संगोष्ठी का आयोजन देवकी नगर स्थित, देवकी पैलेस, प्रदेश कार्यालय, कानपुर में किया गया है। संगोष्ठी मुख्य रूप से तीन बिन्दुओं पर आयोजित की गई थी। उत्तर प्रदेश शासन द्वारा विमुक्त जातियों को जाति प्रमाण पत्रों के जारी न करने के कारण एवं निवारण पर विमर्श। केन्द्र में विमुक्त एवं घुमंतू जनजातियों के लिए स्थाई संवैधानिक आयोग के गठन के लिए आगामी लोकसभा सत्र में प्रश्न उठाए जाने की आवश्यकता पर बल। डॉ बी के लोधी ने अपने उद्बोधन में कहा कि उत्तर प्रदेश में निवासरत विमुक्त एवं घुमंतू जनजातियों की 6 करोड़ आबादी अपनी मूलभूत पहचान के संकट से जूझ रही हैं। उत्तर प्रदेश ही एक ऐसा राज्य है जहां पर इन सभी समुदायों को जाति प्रमाण पत्र निर्गत नहीं किए जा रहे हैं। जिन्हें निर्गत भी किए जा रहे हैं उन पर जिलेवार प्रतिबंध लगा हुआ है। परिचर्चा में प्रमुख रूप सहभागी रहेंगे – परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष लक्ष्मी नारायण सिंह, ‘यशभारती डॉ रामकृष्ण राजपूत, डॉ बीके लोधी, डॉ. साहब दीन, रमेश चंद्र लोधी एडवोकेट, कैलाश निषाद, स्वामी श्यामदेव मान सिंह लोधी, बासुदेव, सादिक अखवी, राजेन्द्र प्रसाद गौड़, गया प्रसाद धूरिया आदि ने प्रतिभाग किया।

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