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विश्व हेपेटाइटिस दिवस पर प्रेस वार्ता द्वारा जानकारी दी गई

कानपुर नगर मंगलवार को डॉक्टर गौरव चावला द्वारा एक प्रेस वार्ता के जरिए विश्व हेपेटाइटिस पर जानकारी दी गई की हम सभी एचआईवी के बारे में जानते हैं कि यह दुनिया की अब तक की सबसे खतरनाक और जानलेवा बीमारी है। लेकिन, एचआईवी की तरह ही एक और बीमारी है जिस पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया जा रहा है और टाइम बम की तरह यह बीमारी कभी भी विस्फोट कर सकती है। हम बात कर रहे हैं हेपेटाइटिस की, जो एक वाइरल इन्फेक्शन है। यह बीमारी लीवर को प्रभावित करती है और दुनिया भर में बड़ी संख्या में मौत और अपगंता का कारण है। लासेट जर्नल में प्रकाशित एक नई स्टडी में खुलासा किया गया है कि पिछले 29 सालों में वायरल हेपेटाइटिस से होने वाली मौत में 63 फीसदी बढ़ोतरी हुई है।आपको बता दें कि वायरल हेपेटाइटिस पांच तरह की होती है, जिनके नाम हेपेटाइटिस ए, बी, सी, डी और ई हैं। ये सभी बीमारियां संक्रामक होती है पानी एक व्यक्ति से दूसरे में फैल सकती हैं और इनमें से कुछ के कारण जान भी जा सकती है। इनमें से हेपेटाइटिस ए और ई पानी से पैदा होती है, वहीं हेपेटाइटिस बी, सी और डी सीरिज, नीडल्स, इंजेक्शन, टूथब्रश, रेजर्स एक दूसरे से शेयर करने पर फैलती है जहां हेपेटाइटिस बी, सी और डी लीवर को नुकसान पहुंचाती है, वहीं हेपेटाइटिस ए और ई से इस तरह का कोई खतरा नहीं होता है।हेपेटाइटिस ए और ई को आम तौर पर खुद से परहेज करके रोका जा सकता है और यह बीमारी छह महीने से ज्यादा नहीं रहती है। लेकिन, इस अवधि में सही देखभाल और उपचार नहीं होने पर यह बीमारी जानलेवा भी साबित हो सकती है। हेपेटाइटिस बी और सी से हेपेटाइटिस और ई की तरह ही बीमार पड़ सकते हैं लेकिन इससे लीवर की बीमारी भी हो सकती है जिससे लीवर के कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता। है। हेपेटाइटिस डी का इन्फेक्शन उस समय ही होता है जब कोई व्यक्ति पहले से हेपेटाइटिस बी से पीड़ित हो।
पिछले 20 सालों में हेपेटाइटिस से होने वाली मौत चौकाने वाली है। हेपेटाइटिस के कारण होने वाली भारी मौत के अलावा हमने क्लिनिकल रिसर्च पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया है। इन पांच बीमारियों में से तीन का अब तक कोई इलाज नहीं है। अकेले हेपेटाइटिस सी ने भारत में 1.2 करोड़ लोगों को प्रभावित किया है। उनमें से ज्यादातर लोगों को पता ही नहीं था कि उनके शरीर में इस बीमारी के रोगाणु हैं। हमें ऐसी उपचार व्यवस्था और धेरपी को अपनाना होगा, जिसमें कम समय लगे और जो असरदार और सस्ती भी हो वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन ने खुलासा किया है कि यह चौकाने वाली बात है कि हेपेटाइटिस बी या सी से संक्रमति करीब 95 फीसदों लोगों को पता ही नहीं होता कि वे इस बीमारी से संक्रमित हैं और लम्बे समय तक उनके अंदर बीमारी के लक्षण दिखते नहीं है। अकेले इस साल से 3 करोड़ लोग हेपेटाइटिस बी से प्रभावित होंगे। मौजूदा समय में अल्पकालिक हेपेटाइटिस बी इन्फेक्शन का कोई इलाज नहीं है। इस बीमारी को लम्बे समय तक रहने वाली बीमारी यानी क्रोनिक डिजीज में बदलने में कई कारक महत्वपूर्ण होते हैं। इसलिए अल्पकालिक इन्फेक्शन की रोकथाम ही इस बीमारी के लिए एक निवारक उपाय उपलब्ध है।इस बीमारी का अल्पकालिक संक्रमण बुखार, भूख न लगना, जी मिचलाना, सिर चकराना, पेट में दर्द,जॉन्डिस और गाढ़े पेशाब के रूप में होता है। कोनिक हेपेटाइटिस होने पर सीवर सही से काम नहीं करता है और फेल कर जाता है।

संवाददाता सुमित कुमार

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