कानपुर, स्वतंत्रता दिवस खुशियों का कौमी त्यौहार है इस अवसर पर तिरंगा फहराने से मुल्क की मुहब्बत ज़ाहिर होती है इन विचारों को कौन्सिल के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मो.हाशिम अशरफ़ी इमाम ईदगाह गद्दियाना ने मदरसा अंजुमने बरकात शुजात गंज में सरकारी निर्देशों के अनुसार आल इंडिया ग़रीब नवाज़ कौन्सिल के तत्वाधान में आयोजित ‘’मुल्क की आज़ादी और उलमा-ए-अहले सुन्नत की कुर्बानी’’ नामी प्रोग्राम में व्यक्त किये। अशरफी ने कहा कि हमने एकजुट होकर अंग्रेजों को मुल्क से खदेड़ दिया था आज भी कोरोना से लड़ाई में एकता की ज़रुरत है अगर तमाम सियासी पार्टियाँ,लीडर्स,मिनिस्टर्स और जिला इन्तिज़मिया समेत सभी धर्म गुरु तमाम धर्म और बिरादरी के लोग एक साथ होकर कोरोना के खिलाफ लड़ाई लड़ें तो कोरोना की तीसरी लहर से बचा जा सकता है यौम-ए-आज़ादी के अवसर पर हम अहद करें कि पूरे भारत के लोग एकजुट होकर कोरोना को एहतियाती तदबीरों से यानी मास्क,सेनी टाईज़र और दो गज की दूरी से शिकस्त देंगे उन्होंने कहा मुल्क की आज़ादी में हज़ारों उलमा को फाँसी दी गयी बहुतों को काले पानी की सज़ा हुई मगर उलमा पीछे नहीं हटे और डट कर आखरी दम तक मुल्क की आज़ादी के लिए लड़ते हुए शहीद हो गए उन्हों ने जांबाज़ बहादुरों में से एक नाम अल्लामा फजले हक खैराबादी का है उन्हों ने अंग्रेजों के खिलाफ जिहाद का फतवा दिया और 1857 की जंग में बहादुर शाह ज़फर के साथ थे जिस की वजह से अंग्रेजों ने आप को काले पानी की सज़ा दी और आप का इन्तिकाल हो गया हाफिज मो.अरशद अशरफी व कारी मो.अहमद और लोगों ने मिलकर कौमी तराना पढ़ा जिस जिस से माहौल खुशगवार हो गया | इस से पूर्व प्रोग्राम का आगाज़ कुरान पाक की तिलावत से हाफिज मिन्हाजुद्दीन क़ादरी शहर जनरल सेक्रेटरी कारी कलीम नूरी जमील खैराबादी,साबिर फरीदी,दिलशाद कानपुरी ने नातें पढ़ीं संचालन हाफिज अख्तर रज़ा ने किया |


















