कानपुर, लगभग 50 माताओं पैरामेडिकल स्टाफ में भाग लिया कार्यक्रम का संचालन डॉ आशीष श्रीवास्तव , डॉक्टर अमित चावला, डॉक्टर जे0के0 गुप्ता ने किया कार्यक्रम संचालन करते हुए डॉ आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि मां द्वारा अपने शिशु को अपने स्तनों से आने वाला प्राकृतिक दूध पिलाने की क्रिया को स्तनपान कहते हैं वास्तु के लिए संरक्षण का काम करता है नवजात शिशु में प्रतिरोधक क्षमता नहीं होती है मां के दूध से आंसुओं को प्राप्त होती है शिशु को स्तनपान कराने से शारीरिक विकास में बढ़ने में मदद मिलती है उन्होंने बताया कि मां का दूध ही सर्वोत्तम आहार है हर मां को अपने शिशु को 6 माह तक दूध पिलाना चाहिए विश्व स्तनपान सप्ताह के अंतिम दिन आज नवजात शिशु रोग विशेषज्ञों की संस्था निओनेटोलॉजी एसोसिएशन कानपुर के अध्यक्ष डॉ जे के गुप्ता ने बताया कि आज भी अपने देश मे केवल 55 प्रतिशत माताएं छह माह की उम्र तक अपने शिशु को पूर्ण रूप से स्तनपान करवाती हैं और केवल 41 प्रतिशत माताएं जन्म के एक घण्टे के भीतर स्तनपान शुरू कर पाती हैं। स्तनपान के प्रति जागरूकता के अभाव में आज भी प्रति हजार 34 बच्चे एक वर्ष की उम्र में ही कालकवलित हो जाते हैं और प्रतिवर्ष भारत में स्तनपान के अभाव में प्रतिवर्ष लगभग 1 लाख बच्चे मृत्यु का शिकार हो जाते हैं। एक अनुमान के मुताबिक भारत मे स्तनपान के अभाव में अर्थव्यवस्था पर करीब 732 करोड़ का अतिरिक्त भार देश को झेलना पड़ता है।
अंजलि हॉस्पीटल श्याम नगर मे स्तनपान पर एक कार्यशाला का आयोजन हुआ


















