शारदीय नवरात्र शुरुआत शहर भर के देवी मंदिरों में माता के दर्शन के लिए भक्तों का तांता लगा जाता है लेकिन इस कोरोना महामारी के कारण लोगो को दर्शन तो होंगे लेकिन इस बार माँ तपेस्वरी देवी मंदिर में प्रसाद नही चढ़ा सकेंगे भक्त 2 गज की दूरी से करेंगे दर्शन,हर कोई हाथों में प्रसाद चुनरी व जय माता दी के जयकारों के साथ माता के दरबार तक पहुंचता दिखाई देता था। आपको बताते चले कि मंदिर के पुजारी राम लखन ने बताया की विगत कई वर्षों से नवरात्रि में 251 दिए की देसी घी की अखंड ज्योति माता के समक्ष जलाई जा रही है ,श्रद्धा अनुसार जो भी भक्त अखंड ज्योति में घी का चढ़ावा करता है उसकी माता मनोकामना जरूर पूरी करते हैं
मां तपेश्वरी देवी का मंदिर रामायणकाल से जुड़ा है। मान्यता है कि इस मंदिर में माता सीता ने आकर महीनों तप किया था और अपने पुत्रों लव-कुश का मुंडन और कनछेदन संस्कार भी इसी परिसर में किया था जिसके लिए इस पवित्र स्थान का नाम तपेश्वरी पडा। ऐतिहासिक तपेश्वरी मंदिर पर भक्तों ने 4 देवियों की पूजा-अर्चना की जाती है। मान्यता है कि सैकड़ों साल पहले मां सीता कानपुर के बिठूर में ठहरी थीं। माता सीता बिठूर से आकर इस मंदिर में तप करती थीं। यहां पर एक मठ भी निकला जिसको माता सीता के नाम से जाना जाता है यहां आकर हाजिरी लगाएं तो उनकी मुराद मातारानी की कृपा से पूरी हो जाती है। इसी के चलते इस मंदिर पर पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं की उपस्थित अधिक होती है। महिलाएं माता से प्राप्त आशीर्वाद पुत्र या पुत्री को उनके दर्शन कराने हर नवरात्रि में आती है और उनका मुंडन और कनछेदन करवाती हैं।



















