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जीका वायरस से बचाव हेतु जन जागृति अभियान

एस एन सेन बालिका इंटर कालेज मालरोड में जिला रेडक्रॉस सोसायटी कानपुर द्वारा जीका वायरस से बचाव हेतु जन जागरुकता अभियान लखन शुक्ला मास्टर ट्रेनर रेडक्रॉस मुख्य प्रशिक्षक आपदा प्रबंधन कानपुर ने दिया जीका वायरस भी वही मच्छर की प्रजाति से फैलता है जिससे डेंगू भी फैलता है, यानी एडीस मच्छर। जीका वायरस सलाइवा और सीमेन जैसे शरीर के तरल पदार्थ के आदान-प्रदान से संक्रामक हो सकता है। यह मनुष्यों के खून में भी पाया जा सकता है।रक्तदान के 14 दिनों के भीतर अगर व्यक्ति को जीका वायरस संक्रमण के साथ निदान किया गया है, तो रक्त दान नहीं करना ही उचित है।जीका वायरस के लक्षण डेंगू के समान हैं। किसी व्यक्ति को संक्रमित मच्छर से काटे जाने के बाद थोड़ा जीका बुखार और चकत्ते दिखाई दिए जा सकते है। कॉंजक्टिवेटाइटिस, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, और थकावट कुछ अन्य लक्षण हैं जिन्हें महसूस किया जा सकता है। लक्षण आमतौर पर 2 से 7 दिनों तक चलते हैं सामान्य दर्द और बुखार दवाओं से जीका वायरस का इलाज किया जा सकता है।

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