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जगतगुरू साहिब श्री गुरू नानक देव जी महाराज के 553वें पावन प्रकाशोत्सव के त्रि-दिवसिय समारोह

कानपुर , मंगलवार | जगतगुरू साहिब श्री गुरू नानक देव जी महाराज के 553वें पावन प्रकाशोत्सव के त्रि-दिवसिय समारोह के आज दूसरे दिन जहां एक तरफ संगत गुरुवाणी के शब्द-कीर्तन व कथा से निहाल हुई तो दूसरी तरफ गुरू के लंगर की सेवा कर गुरू की खुशियां प्राप्त की , प्रात:काल से ही भारी संख्या में संगत मोतीझील के पंडाल में गुरू ग्रंथ साहिब के समक्ष नतमस्तक हो महान गुरू के प्रति अपनी श्रद्धा अर्पित कर रही थी गुरुद्वारा श्री गुरू तेग बहादुर चौक के हजूरी रागी भाई नरिंद्र सिंह ने ” जाहर पीर जगत गुरू बाबा” का अपनी मधुर वाणी में कीर्तन किया तो
भाई कुलदीप सिंह राजा व भाई भूपिन्दर सिंह गुरदासपुरी ने “आसा दी वार ” का कीर्तन किया , पन्थ के महान कीर्तनिये श्री दरबार साहिब अमृतसर के हजूरी रागी भाई सुरिंदर सिंह ज्वद्दी कलां वालों ने अपनी शैली में “नानक आया नानक आया कल तारण गुरू नानक आया ” का गायन करते ही पंडाल ” बोले सो निहाल , सत श्री अकाल ” से गुंजायमान हो गया , गुरमत विचार करते हुये ज्ञानी जसविंदर सिंह फतेहगढ साहिब वालों ने कहा कि गुरू नानक किसी भी धर्म विशेष के गुरू या पीर नही थे वह तो पूरी मानवता के अराध्य गुरू थे गुरू नानक ने किरत करो, नाम जपो , वंड छको के सिद्धांत पर चलने की प्रेरणा दे कर मानव जीवन को एक नई राह दिखाई । प्रातःकाल दिवान की समाप्ति अरदास से हुई अरदास में सरबत के भले की प्रार्थना की गई। इसी प्रकार आज रात के दिवान में भी उक्त रागी जत्थे गुरूवाणी कीर्तन व गुरमत विचारों से संगत को निहाल करेंगे |
श्री गुरू नानक देव जी के प्रकाशोत्सव के मुख्य समारोह कल शुक्रवार को होंगे जहां कीर्तन व कथा के दिवान के साथ ही गुरू का अतुट लंगर भी होगा , लंगर की सेवा आज के धार्मिक दिवान के बाद से ही प्रबंधकों व संगत ने जोश के साथ प्रारम्भ कर दी इस्त्री, पुरूष , बच्चों की अलग अलग टीमें दाल , सब्जी साफ करने से लेकर उन्हे काटने व बनाने की सेवा में मग्न दिखाई दे रहे थे हर तरफ से वाहे गुरु – वाहे गुरू के जाप से माहौल पावन व भक्तिरस से डूबा था कुन्टलों दाल , सब्जी , आटा, आचार / सलाद का लंगर श्रद्धालू संगत के लिये तैयार करने के लिये कोई भी सेवा में पीछे नही रहना चाहता सभी अपनी सेवा समर्पित करने को तत्पर से प्रतीत हो रहें हैं ” सेवक को सेवा बन आयी ” की पंक्तियों को यहां चरित्रार्थ होते देखा जा सकता है कल यही लंगर लगभग एक से डेड लाख की संगत के मध्य वितरित होगा | जहां “एक संगत एक पंगत” के अनुरूप लंगर छकेंगे । लंगर इंचार्ज स. मंजीत सिंह सागरी अपनी उम्र से ज्यादा जोश के साथ गुरू के लंगर की तैयारी में समर्पित रूप से सेवा को सम्पन्न कराने को तत्परता से लगे थे तो उनके सहयोगी बाबा मोहन सिंह झास, जसवंत सिंह भाटिया, गुरदीप सिंह भी सेवादारों की जरूरतों को पूर्ण करने में व्यस्त रहे, दिवान एवं लंगर सेवा में मुख्य रूप से श्री गुरू सिंह सभा के प्रधान स. हरविन्दर सिंह लार्ड , सुखविन्दर सिंह भल्ला लाडी , करमजीत सिंह , हरमिन्दर सिंह लोंगोवाल , मीतू सागरी , हरजिंदर सिंह काले , मनमीत सिंह राजू , जयदीप सिंह राजा , हरजीत सिंह सोनी, देवेंदरपाल सिंह , सतनाम सिंह सूरी , सुरिन्दर सिंह छिन्दा , जसपाल सिंह पनेसर आदि सेवा कार्यों में अपनी सेवा समर्पित कर रहे थे।

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