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कृष्ण-प्रेम के स्रोत है भगवान् नित्यानंद

बिठूर मैनावती मार्ग स्थित श्री श्री राधामाधव मंदिर (इस्कॉन) में ०३ फ़रवरी को नित्यानंद त्रयोदशी के अवसर पर भव्य आरती व कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। अंतराष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ के तत्वाधान में संचालित श्री श्री राधामाधव मंदिर कानपुर सनातन वैदिक संस्कृति और भक्ति योग की परंपरा का प्रचार करता है जो की भक्तिवेदांत स्वामी श्रील प्रभुपाद द्वारा संस्थापित है , इस वैष्णव गुरु परंपरा व हरे कृष्ण आंदोलन के प्रवर्तक भगवान् चैतन्य महाप्रभु व भगवान् नित्यानद है जिन्हे शास्त्रों व पुराणों में वर्णित भगवान् के विभिन्न अवतारों में से एक श्री कृष्ण व बलराम का विस्तार आचार्यो द्वारा स्वीकार किया गया है। इस अवसर पर इस्कॉन मंदिर में अथिति कथावाचक श्रीमान दामोदर प्रभु जी को आमंत्रित किया गया उन्होंने कहा कि “शास्त्रों के कथानक अनुसार कलयुग में धर्म की हानि निश्चित है क्योंकि मनुष्य में जीव हिंसा ,नशापान,जुआ व अवैध संग जैसी दुष्प्रवृत्तियाँ बढ़ती जाएँगी ऐसे में आम जनमानस के उद्धार की सम्भावना संभव नहीं है न ही कोई शुद्ध वैदिक जीवन जीने का ज्ञान ही प्राप्त कर सकेगा क्योंकि यह दुष्प्रवृत्तियाँ मनुष्य के मन को विचलित रखेंगी ,ऐसे में कृष्ण-बलराम जीवो पर कृपा हेतु स्वयं चैतन्य महाप्रभु व नित्यानंद प्रभु के रूप में कलयुग में प्रकट हुए ,उनका मुख्य लक्ष्य कलयुग के पतित मानव समाज को हरिनाम संकीर्तन आंदोलन देकर भक्तियोग सिखाना था” नित्यानंद प्रभु का का प्राकट्य माघ शुक्ल त्रयोदशी के दिन ही हुआ था जिसे वैष्णव समाज नित्यानंद त्रयोदशी के रूप में मनाता है , आज से ५०० वर्ष पूर्व चैतन्य महाप्रभु व नित्यानंद प्रभु ने मिलकर हरे कृष्ण आंदोलन का प्रारम्भ बंगाल की भूमि से किया था , जो की आज एक विश्वव्यापी भक्ति आंदोलन है और किसी भी प्रकार के भेदभाव से रहित है ,यह आंदोलन श्रीमद्भगवद्गीता व श्रीमद्भागवत की शिक्षाओं पर आधारित है और लाखो लोगो के जीवन में उत्साह जनक परिवर्तन ला चुका है ,भगवान् नित्यानदं इस आंदोलन के प्रथम गुरु है ,जो हमे भगवान् द्वारा प्रद्दत ग्रंथो पर आधारित जीवन जीना सिखाते है और भगवान् श्रीकृष्ण के प्रति शरणागत होकर अपने नाम के अनुरूप नित्य आनंद में रहना सिखाते है। इस अवसर पर मंदिर में भगवान् का भव्य श्रृंगार किया गया, पुष्पों व आभूषणों से विग्रहो को सजाया गया , विभिन्न फलो के रस द्वारा व दूध ,दही आदि से भगवान् के विग्रहो को दिव्यस्नान कराया गया , नगर भर से आये भक्तो द्वारा दिव्य आरती के दर्शन किये गए ,बड़ी संख्या में भक्तो ने भोग अर्पण किया व निरंतर चलने वाले हरे कृष्ण हरे राम कीर्तन की धुन पर जमकर नृत्य किया ,भक्तिमय वातावरण के बीच मंदिर अध्यक्ष श्री प्रेम हरिनाम दास जी द्वारा सभी के लिए शुभकामनाये प्रेषित की गयी व आआगन्तुक सभी भक्तो के लिए विशेष प्रसाद वितरण भी किया गया।

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