इस्कॉन कानपुर में दिनांक 7 फरवरी से 9 फरवरी तक स्वामी श्रील प्रभुपाद जी के वरिष्ठ अमेरिकी शिष्य श्रीमान अनुत्तम प्रभुजी एवं उनकी पत्नी श्रीमती रूकमणि माता जी संपूर्ण भारत से आए हुए कृष्ण भक्तों को विलक्षण कृष्णभावनामृत शिक्षा प्रदान करे रहे हैं।
इस्कॉन का संथापक आचार्य स्वामी प्रभुपाद 1965 में अमेरिका पहुंचे और करीब 10 हजार विदेशी शिष्य मात्र 12 साल में अमेरिका और यूरोप में बनाए और स्वामी प्रभुपाद 14 बार पूरे विश्व का भ्रमण किया ।
श्रीमान अनुत्तम प्रभुजी एवं श्रीमती रूकमणि माता जी श्रील प्रभुपाद के प्रथम 100 शिष्यों में से एक हैं।
वे पिछले चार दशकों से भी अधिक समय से वैदिक शास्त्रों के अनुसार आध्यात्मिक ज्ञान का प्रचार प्रसार कर रहे हैं।
श्रीमान अनुत्तम प्रभुजी वर्तमान समय में इस्कॉन इंटरनेशनल कम्युनिकेशंस के डायरेक्टर के पद पर सेवारत है। और पूरे विश्व के नेताओं, व्यापारियों इत्यादि को इस्कॉन की विभिन्न गतिविधियों के बारे में अवगत कराते है और पूरे विश्व में इस्कॉन की गतिविधियों को समाचार और पत्राचार के माध्यम से प्रसारित करते है।
प्रभुजी ने भारत भर से आए हुए भक्तों को श्रीमद्भगवद्गीता आदि वैदिक ग्रंथों को जन-मानस तक पहुंचाने हेतु प्रचार के तरीकों का ज्ञान प्रदान किया।
साथ ही श्रीमती रूकमणि माता जी ने माताओं को शास्त्रों के अनुसार स्त्री धर्म का संदेश प्रदान किया। महिलाओं को वैदिक शास्त्र के अनुसार पतिव्रता धर्म को सबसे महत्पूर्ण बताया । रुक्मणि माता जी ने माताओं को बच्चो को विशेष रूप से रामायण और महाभारत की कहानी के माध्यम से बचपन से कृष्ण भक्ति में लगाने के लिए प्रत्साहित किया ।
ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से भारत के युवक युवतियों को निश्चित ही अपनी आध्यात्मिक सभ्यता को अपनाने का स्वर्णिम अवसर प्राप्त होता है। और उन्हें सोचना चाहिए कि कैसे हमे भारतीय संस्कृति पर गर्व होना चाहिए। कि कितने सारे विदेशी भी इस संस्कृति को अपनाकर और हरे कृष्ण महामंत्र का जप करके अपने जीवन में सच्ची खुशी और जीवन के परम लक्ष्य की प्राप्ति कर रहे है।



















