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भगवान् का स्मरण सम्पत्ति,तथा विस्मरण है विपत्ति: आचार्य अभिषेक

कानपुर। बाबा महाकालेश्वर मन्दिर के छब्बीसवें वार्षिकोत्सव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के द्वितीय दिवस पर आचार्य अभिषेक शुक्ल जी ने कहा कि यद्यपि सर्वेश्वर परमात्मा की अनुकम्पा सभी पर समान है,तथापि स्वभक्त पर अनन्य अनुकम्पा है,भगवान् के आराधक तो विपत्तियों में भी उनकी अपरिमित अनुकम्पा का अनुभव करते हैं,विपत्ति भी भगवान् की स्मृति का साधन है,कुन्ती माता भगवान् श्रीकृष्ण से सदा विपत्तियों के रहने की कामना करती है,जिससे परमात्मा का अपरोक्ष दर्शन होता है तथा उससे जन्ममृत्यु का बन्धन समाप्त हो जाता है, ज्योतिषाचार्य नरेन्द्र शास्त्री ने बताया भगवान् का विस्मरण होना ही वस्तुत: विपत्ति है और उनका स्मरण बना रहे यही सर्वोत्तम सम्पत्ति है,इसीलिए कुन्ती माता ने भगवान् से विपत्ति का वरदान माँगा है,इनके अतिरिक्त कोई दूसरा उदाहरण नहीं है,जिसने भगवान् से विपत्ति का वरदान माँगा हो,भीष्म चरित्र में बताया पितामह ने भगवान् श्रीकृष्ण का प्रत्यक्ष दर्शन,और विष्णुसहस्रनाम का उच्चारण करते हुए परमपद को प्राप्त किया,परीक्षित जन्म,शुकदेव आगमन,सृष्टि प्रकरण आदि की कथा का विस्तृत वर्णन सुनाया इस अवसर पर अजित श्रीवास्तव, अजीत गुप्ता, बालयोगी चैतन्य अरूण पुरी जी महाराज, विजयलक्ष्मी शर्मा, सुषमा द्विवेदी, डॉ संध्या ठाकुर,पुष्पा सिंह चौहान, अनीता अग्रवाल,दीपा निगम,प्रेमादेवी यादव उपस्थित रहे l

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