Advertisement

उत्तर प्रदेश महिला शिक्षक संघ द्वारा बीएसए को सौंपा ज्ञापन

कानपुर नगर

प्रधानमंत्री भारत सरकार, नई दिल्ली। केन्द्रीय शिक्षा मंत्री, भारत सरकार नई दिल्ली। केन्द्रीय विधि मंत्री,भारत सरकार, नई दिल्ली। को द्वारा जिलाधिकारी जनपद कानपुर नगर तथा जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी जनपद कानपुर नगर को एक ज्ञापन उत्तर प्रदेश महिला शिक्षक संघ द्वारा सौंपा गया।
दिए गए ज्ञापन में मा० उच्चतम न्यायालय द्वारा पारित निर्णय दिनांक 01.09.2025 के भूतलक्षी प्रभाव के संदर्भ में शिक्षकों द्वारा अपनी बात कही गई।
साथ ही कहा कि यह निर्णय मा० उच्चतम न्यायालय ने संविधान के अनुच्छेद 142 द्वारा प्रदत्त शक्तियों के द्वारा दिया गया। भारतीय संविधान का अनुच्छेद 142 में सर्वोच्च न्यायालय को किसी भी लम्बित मामले मे पूर्ण न्याय सुनिश्चित करने के लिए आदेश पारित करने की शक्ति देता है। भले ही वह मौजूदा कानूनों में न हो, यह निर्णय पूरे भारत में बाध्यकारी होते हैं। यह अनुच्छेद सर्वोच्च न्यायालय को कानून की सेवाओं से परे जाकर न्याय निर्णयन करने का अधिकार भी देता है। इस संबंध में अवगत कराना है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009, उत्तर प्रदेश में 27 जुलाई 2011 से लागू/प्रभावी है। 27 जुलाई 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों की अर्हता में TET सम्मिलित नहीं था जबकि मा० उच्चतम न्यायालय के उपरोक्त निर्णय में 27 जुलाई 2011 के पूर्व नियुक्त शिक्षकों को TET उत्तीर्ण करना अनिवार्य है। इस निर्णय से 30 से 35 वर्ष पूर्व नियुक्त शिक्षकों को भी TET उत्तीर्ण करना अनिवार्य है।
इस निर्णय से शिक्षक मानसिक रूप से अवसाद में है, शिक्षक देश की आजादी के बाद पूरी निष्ठा के साथ कार्य करते हुए देश की साक्षरता दर को उच्चतम स्तर पर अति अल्प समय पर पहुंचाया है।
भारत एवं स्वतंत्र भारत में ऐसा कोई कानून नहीं बना जो भूतकाल से लागू हो। सभी कानून निर्मित या पारित होने की तिथि से या उसके बाद सरकार या संसद या विधायिका द्वारा घोषित – तिथि से ही लागू किये जाते हैं, भूतकाल से लागू नहीं होते हैं। यही व्यवस्था पूरे विश्व के विधि व्यवस्था में है।
27 जुलाई 2011 के पूर्व नियुक्त शिक्षकों को TET की अनिवार्यता से मुक्त करने की बात शिक्षकों ने प्रदर्शन करते हुए कही।

देवेश तिवारी की रिपोर्ट

WhatsApp Image 2023-11-24 at 3.32.09 PM
WhatsApp Image 2025-12-26 at 18.39.14
nsingh