कानपुर , आल इंडिया ग़रीब नवाज़ कौन्सिल के तत्वाधान में ज़िक्रे शोहदाए कर्बला अशरा का सातवाँ प्रोग्राम कौंसिल के राष्ट्रिय अध्यक्ष मौलाना मो. हाशिम अशरफी इमाम ईदगाह गद्दियाना की सरपरस्ती में बमुकाम मस्जिद हसन हुसैन सनिगवां कालोनी में सरकारी गाईड लाईन के अनुसार आयोजित हुआ ! जलसे को मुख्य रूप से संबोधित करते हुए मौलाना मो.कासिम अशरफ़ी ने कहा कि अहले बैत-ए-नुबुव्वत, खान्वादए नुबुव्वत है | हजरते फातमा ज़हरा का मुक़द्दस घराना है | अहले बैत की मुहब्बत बाईसे तकमीले ईमान है कुरआन का मफहूम है कि ऐ महबूब आप फरमा दीजिए मै इस तबलीग़ पर तुम से कोई उजरत नहीं मांगता मगर मेरी अहले बैत से मुहब्बत चाहता हूँ ! हदीस पाक का मफहूम है कि मै तुम में दो चीज़ें छोड़े जा रहा हूँ एक है कुरान और दूसरी मेरी अहले बैत है ! जब तक तुम इन दोनों का दामन थामे रहोगे कभी गुमराह नहीं होगे कुरआनी आयतें और हदीसें हमें बता रही हैं कि अहले बैत का मकाम बहुत ही बूलंद बाला है और उन से मुहब्बत रखना हर मुसलमान पर बहुत ज़रूरी है उनहोंने कहा कि शहीदों की कुर्बानियों ने मजलूम इन्सानियत को जालिमाना निज़ाम और ज़ुल्म व जब्र के खिलाफ़ डट जाने का हौसला दिया है | हज़रत इमाम ए हुसैन और करबला के शहीदों ने अज़ीम कुर्बानियां देकर हमें ज़ुल्म और ज़ालिम के खिलाफ़ डट जाने का अमली दर्स दिया है तमाम इंसानों को हज़रत इमाम ए हुसैन का किरदार अपनाने की ज़रुरत है इस से पूर्व जलसे का आगाज़ कुरान पाक की तिलावत से मौलाना मो.नवाज़ ने किया संचालन हाफिज मो.अरशद अशरफी ने किया खुरशीद आलम मिम्बर कौंसिल,कारी मो.अहमद अशरफी,हाफिज मंसब रज़ा,मौलाना आरिफ क़ादरी ने नात व मन्क़बत पेश किये हलक-ए-ज़िक्र किया गया इस अवसर पर प्रमुख रूप से मो.इदरीस खान,शहजादे आलम,हयात खान,शानू,हाजी हशमतुल्लाह,मो.अम्मार अशरफ,मो.अशरफ,आसिफ़ जीलानी,मजहर अशरफ़ी,मो.यूसुफ़,शेखू,सलीम,मो.रज़ा,शाहज़ाद राजू आदि उपस्तिथ रहे!
तमाम इंसानों को हज़रत इमाम ए हुसैन का किरदार अपनाने की ज़रुरत है (मौलाना मो.कासिम अशरफ़ी)


















