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6 वर्ष पूर्व गायब अधिवक्ता आशिक अली के मुकदमें की पुनः जांच का आदेश

कानपुर, कचहरी से वर्ष 2015 में गायब हुए अधिवक्ता आशिक अली के मुकदमे में पुलिस द्वारा दाखिल एफ आर निरस्त कर अदालत ने पुनः जांच का आदेश दिया।
वरिष्ठ अधिवक्ता पंडित रविंद्र शर्मा संयोजक अधिवक्ता कल्याण संघर्ष समिति ने बताया कि कानपुर कचहरी में हम लोगों के साथ वकालत करने वाले अधिवक्ता आशिक अली 12 जून 2015 को कचहरी से घर को निकले और गायब हो गए। 15 जून को उनके पिता मो अली ने रिपोर्ट लिखे जाने हेतु कोतवाली में प्रार्थना पत्र दिया जिस पर तमाम प्रयासों पर 24 जून को मु अ संख्या 369 सन 2015 धारा 364 भा द स में रिपोर्ट लिखी गई , अधिवक्ता का पता लगाए जाने हेतु हम लोगों ने धरना प्रदर्शन किए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डीआईजी आईजी, मुख्यमंत्री व भारत सरकार के गृहमंत्री राजनाथ सिंह से मिले सभी ने बराबर आश्वासन दिए आवश्यक कार्रवाई हेतु लिखा किंतु आशिक अली का कोई पता नहीं चला।
जांच के दौरान वादी ने तत्कालीन मुख्यमंत्री की सुरक्षा में तैनात मुख्तार अहमद पर संदेह जताया था जिस पर आलोक यादव अपर मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट तृतीय कानपुर नगर ने प्रोटेस्ट पिटिशन पर सुना और केस डायरी का अवलोकन कर आदेश दिया कि प्रकरण की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए अग्रतर (पुनः) विवेचना की जाए।
हम लोगों को विश्वास है कि अब 6 वर्ष पूर्व गायब हुएअधिवक्ता आशिक अली के संबंध में सभी कुछ पता चल जाएगा कि उनके साथ क्या हुआ। वह जिंदा भी है या नहीं और यदि कोई उनके साथ घटना घटी तो कैसे कटी कहां घाटी और किसने की।
शैलेश त्रिवेदी संगीता द्विवेदी सर्वेश त्रिपाठी संजीव कपूर राज कुमार त्रिपाठी आयुष शुक्ला विजेंद्र डो डियाल नरेंद्र नाथ प्रीति सविता शक्ति चौरसिया विजय सागर अंकुर गोयल आदि रहे।

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