कानपुर में और आज सम्पूर्ण विश्व मे नैतिक व चारित्रिक मूल्यों का इतना हास हो गया है कि मानव, मानवीय संस्कारों संस्कृति, सामाजिक समरसता को भूल सा गया है । आज अनुशासनहीनता, हिंसा- आतंकवाद, भ्रष्टाचार दीमक की तरह इतना फैल गया है ,कि हमारी दशा-दिशा बदल गई है। आज हम अशान्त व दुखी जीवन जी रहे है, हमारा पर्यावरण जीवन शैली, रहन-सहन, खान-पान इतना दूषित हो गया है, कि सांस लेना भी मुश्किल हो रहा है। उपर्युक्त विचार अणुव्रत समिति के नवनिर्वाचित अध्यक्ष टीकमचन्द्र सेठिया ने अणुव्रत आन्दोलन के 73वॉ० स्थापना दिवस पर तेरापंथ भवन में मीडिया के साथ अणुव्रत संवाद में कहे। अणुव्रत आन्दोलन मानवीय एकता व इंसानियत का आंदोलन है। यह जन-जन का आन्दोलन है, इसमें किसी भी धर्म, जाति व सम्प्रदाय को मानने वाला कोई भी व्यक्ति जुड़ सकता है। आज से 73 वर्ष पूर्व जैन आचार्य तुलसी ने सन् 1949 में असली आजादी अपनाओं के उद्घोष के साथ अणुव्रत आंदोलन का प्रवर्तन किया। आचार्य तुलसी का मानना था ,कि जब तक भारत का नागरिक अनैतिकता, हिंसा, सांप्रदायिकता विद्वेष और रूढ़िवादी सोच से आजाद नही होगा, देश की आजादी अधूरी रहेगी।
अणुव्रत समिति के मंत्री प्रमोद सुराना ने कहा कि समाचार पत्र व मीडिया समाज के लिए एक आईना का कार्य करता है। अणुव्रत के प्रसार-प्रचार में समाचार पत्रों व मीडिया की बहुत बड़ी भूमिका होती है, जिससे मानवीय व अध्यात्मिक जन -जागरण मे महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते है।
आज की गोष्ठी में शहर के प्रमुख समाजसेवी जो अणुव्रत से जुड़े हुये है ,श्री विजय पाण्डेय, मनीकान्त जैन, कुंज बिहारी गुप्ता, टीकमचन्द्र सेठिया, गणेश जैन, धनराज सुराना, प्रेम चन्द्र सुराना, धनपत पुंगलिया, स्वाती मनोत आदि अनेक कार्यकर्ता उपस्थित थे ।
Reporter:- Sumit Kumar


















