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कुपोषण के खिलाफ मेरी जंग आखिरी दम तक- अनामिका सिंह।

*महिला दिवस पर विशेष:*

जुडो नेशनल खिलाड़ी से सीडीपीओ तक का सफर —

*- कुपोषण के खिलाफ मेरी जंग आखरी दम तक-* अनामिका सिंह।  कानपुर। कौन कहता है कि आसमां में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारों…! इस कहावत को चरितार्थ कर दिखाया है नगर की इस बेटी ने जिस पर आज पूरे देश को नाज है
इनका मानना है कि जब शरीर से मेहनत, मन लगन और कार्य करने का हौसला हो तो कोई भी कार्य नामुमकिन नही है। मानवता का उदाहरण प्रस्तुत करने असहायों पीड़ित जनों की सेवा ओर समाजिक कुरीतियों से ऊपर उठकर कुपोषण ओर कोरोना जैसी महामारी को दूर भगाने का मिशन लिए एक ऐसी नारी शक्ति की जिसने अपने हौसलों की उड़ान को अपनी सफलता का पंख बनाकर मिसाल पेश की है ।
जी हां हम बात कर रहे है सरकारी महकमे की उस अफसर की जिसकी मेहनत व लगन के आगे विरोधी भी हैं प्रशंसक बन गए । आज के आधुनिक तकनीकी युग मे भी कुपोषण व के खिलाफ जंग लड़ने वाली अनामिका अब मिशन शक्ति का चेहरा हैं उन्होंने न सिर्फ समाज से रजिस्टर से कुपोषण जैसे शब्द को हटाने की मुहिम ठानी ही बल्कि कोरोना काल मे भी इस मुहिम को जिंदा रख कर लड़कियों को सेहत के साथ ही आत्मरक्षा के गुर भी हैं सिखाये है । महिला दिवस पर पूरा देश में विभिन्न क्षेत्रों में अपनी मेहनत व लगन से परचम फहरा रहीं महिलाओं का सम्मान कर रहा है। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार तो महिलाओं के सम्मान में मिशन शक्ति का कार्यक्रम ही पूरे प्रदेश में चला रही है। कानपुर में मिशन शक्ति का चेहरा बनीं अनामिका सिंह बिना किसी प्रचार के अपने काम में जी जान से जुटी हैं। मनु स्मृति में वर्णित है यत्र तु नार्यः पूज्यन्ते तत्र देवताः रमन्ते, यत्र तु एताः न पूज्यन्ते तत्र सर्वाः क्रियाः अफलाः (भवन्ति) ।
अर्थात जहाँ स्त्रियों की पूजा होती है वहाँ देवता निवास करते हैं और जहाँ स्त्रियों की पूजा नही होती है, उनका सम्मान नही होता है वहाँ किये गये समस्त अच्छे कर्म निष्फल हो जाते हैं।
नारी शक्ति को नमन करते हुए हमारे संवाददाता ने भी शहर में ऐसी ही एक नारी शक्ति से मुलाकात की जो किसी पहचान की मोहताज नही है वे बीते 3वर्षों से कानपुर में बाल विकास परियोजना अधिकारी “सीडीपीओ” पद पर तैनात है ओर बीते तीन सालों से कुपोषण के खिलाफ जंग लड़ रही हैं। कुपोषण के साथ ही कोरोना से लोगों का लड़ना सिखाने वालीं अनामिका कानपुर ही नहीं देश भर के युवाओं के लिए मिसाल बन चुकी हैं जो तमाम बाधाओं के बीच भी देश व समाज की सेवा के रास्ते निकाल लेती हैं।
अनामिका की कहानी हूबहू फिल्मी है। उनका कहना है कि अब वो दिन भी चले गए जब खेलने कूदने से बच्चों का भविष्य खराब होता था अब केंद्र से लेकर यूपी सरकार भी खिलाडियो को हर क्षेत्र में वरीयता दी रही है तो खेलो कूदोगे तो बनोगे नवाब जैसी अपनी कहावत पर खुद के बारे में बताते हुए कहती है कि वे एक मध्यम वर्गीय परिवार की  लड़की बचपन में खेलकूद में अव्वल रही। जूडो में राष्ट्रीय स्तर पर विरोधियों को पटका। अखाड़े में भी दांव आजमाया। एक मीटिंग में सरकारी अधिकारियों का रौब देखा तो उसने भी अधिकारी ही बनने की ठानी। मन मे कुछ अलग करने का हौसला था और समाज का विरोध भी मिला पर घरवालों के भरपूर साथ भी मिला और मेहनत रंग लाई। प्रशासनिक सेवा के लिए तैयारी की ओर पहले अटेम्ट में ही जगह बनाने में कामयाब हुई । बतौर बाल विकास परियोजना अधिकारी (सीडीपीओ) कानपुर में तैनात है और अन्य अधिकारियों जैसे रौब जमाने से उसका दूर दूर तक नाता भी नहीं है।

— कुपोषण के खिलाफ मेरी जंग आखरी दम तक-

बीते तीन साल में अनामिका अपने सहयोगियों के साथ कुपोषण के खिलाफ जोरदार और नए तरीकों से जंग लड़ रही हैं और उनके प्रयासों को पूरे प्रदेश में न सिर्फ सराहा जा रहा है बल्कि कानपुर का अनामिका माडल योगी सरकार को भी पसंद आ रहा है। वर्ष 2018 के चैत्र नवरात्र से उनका चलाया अभियान पहला कौर कन्‍या का अभियान ने उन्हें कानपुर ही नहीं पूरे देश में अपनी पहचान दिलाई थी। बताते चलें कि अनामिका सिंह ने कुपोषण के खिलाफ लोगों को न सिर्फ जागरुक किया बल्कि उन्होंने लगातार तीन सालों तक सरकारी स्तर पर चलाये जा रहे पोषण माह में कानपुर को अलग पहचान दिलाई। अब वह मिशन शक्ति के तहत किशोरियों को उनकें अधिकारों के प्रति जागरुक करने के साथ ही उन्हें आत्मरक्षा के गुर भी सिखा रही हैं। आत्मरक्षा का अभियान वह अपनी व्यस्त दिनचर्या में से समय निकाल कर चलाती हैं।

—–जुडो की नेशनल खिलाड़ी से सीडीपीओ तक का सफर—

हां एक बात और जो उन्हें अन्य अधिकारियों से अलग रखती है वो यह कि बच्‍चों और महिलाओं के स्‍वास्‍थ्‍य की चिंता के साथ ही इस बात का विशेष ध्यान रखती हैं कि ये लोग भूखे न रहें। सरकारी स्तर पर लोगों की राशन की कैसे मदद हो ये भी सबको बताती हैं। अनामिका सिंह के बारे में कम ही लोग जानते हैं कि वे जूडो की नेशनल लेवल की खिलाडी़ रही हैं और नेशनल लेवल पर खेले ,14 से अधिक मैचों में कई मेडल भी जीते हैं।इतना ही नहीं वे कानपुर की पहली व सबसे कम उम्र की ब्‍लैक बेल्‍ट होल्‍डर भी रही हैं। इतनी व्‍यस्‍तता के बावजूद पढाई से उनका नाता टूटा नहीं है। आपको बताते चलें कि अनामिका ने दिल्‍ली में सिविल सेवा व अन्‍य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों को पढ़ाया भी है। आज भी सिविल सेवा के परीक्षार्थी समय समय पर उनसे ऑनलाइन मार्गदर्शन पाते हैं।
कानपुर में बच्‍चे कुपोषित न हों इसके लिए वो तीन साल से भी ज्यादा समय ये डटी हैं। लॉकडाउन में भी बच्‍चों व उनकी मांओं से अनामिका लगातार सम्‍पर्क में रही हैं। अपने स्‍टाफ के माध्‍यम से उन्‍होंने कुपोषण और कोरोना के खिलाफ जोरदार लड़ाई जारी रखी हैं। मंत्री हों या अफसर सभी अनामिका के प्रयासों की खुले दिल से सराहना करते हैं। कुपोषित बच्‍चों का वजन उनका टीकाकरण गर्भवती महिलाओं के स्‍वास्‍थ्‍य की जानकारी वह नियमित रूप से ले रही हैं।
वह अपने स्‍टाफ को भी इस काम में जी जान से जुटने के लिए प्रेरित करती रहती हैं। आंगनबाडी कार्यकर्ताओं को मास्‍क लगाने व बाहर निकलने पर सैनेटाजाइजर का प्रयोग करने और घर में साबुन से बार बार हाथ धुलने की सलाह देती रहती हैं। अपने घर को ही उन्‍होंने इस समय कंट्रोल रूम बना रखा है। अपने स्‍टाफ के साथ ही बच्‍चों व उनके घरवालों के वायस मैसेज रिकार्ड कर सबको कोरोना के संक्रमण से बचने और घर में रहने की सलाह दे रही हैं। हमें कोरोना को हराना ही नहीं सबकी सेहत की रक्षा भी करनी है।
कोई न रहे भूखा वो हमेशा अपने स्‍टाफ के माध्‍यम से पता लगाती रहती हैं कि कहीं कोई भूखा तो नहीं। वो अपने स्टाफ की बिना बताये मदद कर देती हैं। चाहे वो आर्थिक रूप से मदद की बात हो या फिर ऑफीसियल । बच्‍चों और महिलाओं की भूख उन्‍हें अंदर से विचलित कर देती हैं। अनामिका साफ कहती हैं कि हमारी योगी सरकार पूरे प्रयास कर रही है कि कोई भी गरीब भूखा न सोयें इसकी भी व्‍यवस्‍था उन्‍हें विभिन्‍न माध्‍यमों से करनी है। काम को लेकर अनामिका बेहद गंभीर हैं। मिशन शक्ति अभियान में वो कानपुर का चेहरा भी बनी हुई हैं।

—सीडीपीओ नही बल्कि बच्चों के लिए अनामिका आज भी है टीचर जी—–

अनामिका आंगनवाड़ी केन्‍द्र में जा जा कर बच्‍चों में कुपोषण के खिलाफ अभियान चलाती रही हैं। बच्‍चों से एक टीचर की तरह मिलना उनसे हालचाल लेना उनके खानपान की जानकारी लेना शुरू से ही उनकी दिनचर्या में शामिल रहा है। अब वह बच्‍चों की जानकारियां फोन के माध्‍यम से जुटाती रहती हैं। वह मानती हैं कि बच्‍चों में कुपोषण का पूरी तरह से खात्‍मा बिना मां बाप के सहयोग के हो नहीं सकता इसलिए अनामिका बच्‍चों के मां बाप के सम्‍पर्क में भी लगातार रहती हैं। उन्‍हें स्‍वयं व बच्‍चों की सेहत के बारे में जागरुक करती हैं। वर्ष 2018 के चैत्र नवरात्र से उनका चलाया अभियान पहला कौर कन्‍या ने कानपुर ही पूरे प्रदेश या कहें देश में खूब तारीफ बटोरी थी। कानपुर की सीडीपीओ अनामिका सिंह के कुशल नेतृत्व में सितम्बर माह में चले पोषण माह में कानपुर लगातार तीसरी बार प्रदेश के जिलों में पहली कतार में था। महिला दिवस पर कानपुर की बेटी अनामिका सिंह को सत सत प्रणाम।

वरिष्ठ संवाददाता:-कमल मिश्रा।

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