कानपुर: श्रीमद्भागवत कथा सुनने से मानव जीवन में संस्कारों का उदय होता है। कथा सुनने का लाभ तभी है, जब हम इसे अपने जीवन में उतारें और उसी के अनुरूप व्यवहार करें। यह विचार नौबस्ता आनंद विहार में श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन चन्द्रेश महाराज चन्द्रदास ने रखे। उन्होंने कहा कि जीवन में कितनी भी विकट परिस्थिति क्यों न आ जाए मुनष्य को अपना धर्म व संस्कार नहीं छोड़ना चाहिए। ऐसे ही मनुष्य जीवन के रहस्य को समझ सकते हैं। जिसका मन भगवान के चरणों में लगा रहता है, उसका जीवन धन्य हो जाता है। भगवान ने विभिन्न लीलाओं के माध्यम से जो आदर्श प्रस्तुत किए, उसे हर व्यक्ति को ग्रहण करना चाहिए। ऐसा करने से जीवन मूल्यों के बारे में जानकारी मिलने के साथ-साथ अपने कर्तव्य को भी समझा जा सकता है। कथा के विराम पर श्रीमदजगदगुरु द्वाराचार्य मलूकपीठाधीश्वर स्वामी राजेंद्रदास देवाचार्य का जन्मोत्सव बड़े धूमधाम से मनाया गया। इस दौरान मलूकपीठाधीश्वर का वैदिक मंत्रों के बीच पूजन किया गया। कर्यक्रम में महामंडलेश्वर श्रीश्री 108 वेदांताचार्य देवनारायण दास महाराज रामजानकी मंदिर गौरियापुर का सम्मान किया गया। महाराजश्री ने श्रीमदजगदगुरु द्वाराचार्य महाराज की महिमा का बखान करते हुए बताया कि महाराजश्री देश -धर्म की रक्षा के लिए सदैव आगे रहते हैं। गोरक्षा के लिए पूरे भारत में कई गोशाला बनवा रखी है। जिसमे लाखों की संख्या में गो माताओं की सेवा हो रही है। कार्यक्रम के दौरान संगीतकारों ने सुंदर भजनों की प्रस्तुति से श्रोताओं को भक्ति रस में डूबों दिया। कार्यक्रम के अंत में शाम तक मां अन्नपूर्णा के भंडारे का प्रसाद सभी ने बढ़चढ़ कर प्राप्त किया। इस मौके पर बिटोला देवी शुक्ला,लक्ष्मी नारायण शुक्ल, बबली शुक्ला, उपेंद्र त्रिपाठी, अचार्य विजय बाजपेई, गौरव मिश्रा, शोभित बाजपेई, दीपक श्रीवास्तव, मनीष श्रीवास्तव, संजय सिंह मौजूद रहे।
श्रीमद्भागवत कथा सुनने से होता है संस्कारों का उदय: चन्द्रदास


















