मैनावती मार्ग बिठूर स्थित इस्कॉन मंदिर कानपुर में रविवार के दिन बड़ी ही धूमधाम से राधा अष्टमी उत्सव मनाया गया। भगवान के श्री विग्रहों का विभिन्न रंगों के पुष्पों द्वारा सुंदर श्रृंगार किया गया एवं श्रृंगार आरती में भक्तों ने भगवान के समक्ष सुंदर एवं उत्साहपूर्वक नृत्य किया। इसके बाद श्रीमान राधा रंजन प्रभु जी एवं श्रीमान दिव्य निताई प्रभु जी ने श्रीमती राधारानी के आविर्भाव एवं श्री कृष्ण के साथ उनकी लीलाओं पर सुंदर कथा कही। प्रभु जी ने बताया की विंध्य पर्वत ने तप करके ब्रह्मा जी को प्रसन्न करके श्रीमती राधा रानी को अपनी पुत्री के रूप में प्राप्त किया और कालांतर में श्रीमती राधारानी बृज धाम में यमुना नदी में कमल पर तैरती हुई वृषभानु महाराज को मिली। भगवान श्रीकृष्ण शक्तिमान हैं और श्रीमती राधारानी उनकी शक्ति हैं। पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान् श्रीकृष्ण जिनकी इच्छा के बिना एक पत्ता भी नहीं हिलता, उन्हें श्रीमती राधारानी अपने भक्तिमय प्रेम एवं त्याग की पराकाष्ठा से नियंत्रित करती हैं। प्रभु जी ने यह भी बताया कि जिस प्रकार से एक माता को प्रसन्न करना पिता की अपेक्षा आसान होता है और वह स्वाभाविक रूप से ही बच्चे पर ज्यादा कृपालु होती है उसी प्रकार श्रीमती राधा रानी की कृपा प्राप्त करना बहुत आसान है एवं वह हम सभी जीवात्मा को भगवान की शाश्वत सेवा का आनंद देने को आतुर रहती हैं। श्रीमती राधारानी की कृपा के बिना हम भगवान श्री कृष्ण को प्रसन्न नहीं कर सकते एवं उनकी कृपा मात्र से ही हम भगवान का निरंतर स्मरण कर सकते हैं। इसके साथ प्रभु जी ने बहुत ही मधुरता एवं उत्साह से भजन एवं कीर्तन गाया जिसमें सभी भक्तों ने भी भाग लिया।शाम को भव्य अभिषेक का आयोजन किया गया। भक्तों ने बहुत ही मधुर कीर्तन किया। भगवान को 508 तरह के अलग-अलग स्वादिष्ट व्यंजनों का भोग लगाया गया। स्थानीय श्रद्धालुओं ने भी पूरे उत्सव में प्रसन्नता एवं उत्साह के साथ भाग लिया। उत्सव पर मंदिर में आये सभी भक्तो को चरणामृत और प्रसादम का वितरण भी हुआ।



















