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आज श्री शान्तिनाथ दिगम्बर जैन मन्दिर आनंदपुरी मे आर्यिका 105 विशिष्ट श्री माता जी के सानिध्य मे क्षमावाणी एवं त्यागीव्रती का सम्मान किया गया । सर्वप्रथम माता जी मुखारविदु से शान्तिधारा की गई यह सौभाग्य श्री विवेक जैन -विकास जैन को प्राप्त हुआ ,उसके उपरान्त माता जी की मंगल देशाना के माध्यम से कहा कि . … मैं सभी जीवों को क्षमा करता हूँ। सभी जीव मुझे भी क्षमा करें। मेरी सभी जीवों से मैत्री है। किसी के साथ मेरा कोई वैर भाव नहीं है।

क्षमावणी का पर्व सौहार्द, सौजन्यता और सद्भावना का पर्व है। आज के दिन एक दूसरे से क्षमा मांगकर मन की कलुषता को दूर किया जाता है। मानवता जिन गुणों से समृद्ध होती है उनमें क्षमा प्रमुख और महत्वपूर्ण है। कषाय के आवेग में व्यक्ति विचार शून्य हो जाता है। और हिताहित का विवेक खोकर कुछ भी करने को तैयार हो जाता है। लकड़ी में लगने वाली आग जैसे दूसरों को जलाती ही है, पर स्वयं लकड़ी को भी जलाती है। इसी तरह क्रोध कषाय को समझ पर विजय पा लेना ही क्षमा धर्म है। उसके बाद चातुर्मास कमेटी के द्धारा 10 दिन और 5 दिन के उपवास(व्रत) करने वालो को श्री महेन्द्र जैन कटारिया ,भामाशाह प्रदीप जैन “तिजारे वाले”,डा.अनूप जैन,संजीव जैन “नेता जी” ,विवेक जैन,शीलचन्द्र जी ,के द्धारा तिलक -माला ,चाॅदी का उपहार ,प्रतीक चिन्ह, जपमाला के माध्यम से सम्मान एवं अनुमोदना की । क्षमावाणी के पावन अवसर पर समाज के सभी वर्गो ने बडो ने छोटो से ,छोटो ने बडो से अपने जीवन काल मे हुई गलतियो की क्षमायाचना की । इस अवसर पर विनोदजैन “क्रेन”,सन्दीप जैन, हेम जैन,अनिल जैन ” कमल टेक्सटाइल ” आदि उपस्थित थे ।

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