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कानपुर विकास प्राधिकरण के अटल बिहारी बाजपेयी प्रेक्षागृह में हिन्दी दिवस के अवसर पर कर्मचारी कल्याण एसोसिएशन द्वारा भव्य कवि सम्मेलन का आयोजन

कानपुर विकास प्राधिकरण के अटल बिहारी बाजपेयी प्रेक्षागृह में हिन्दी दिवस के अवसर पर कर्मचारी कल्याण एसोसिएशन द्वारा भव्य कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में मुख्य अतिथि श्री अरविंद सिंह उपाध्यक्ष कानपुर विकास प्राधिकरण, सचिव श्री शत्रोहन वैश्य, अपर सचिव डा गुडाकेश शर्मा, विशिष्ट अतिथि के रूप में कर्मचारी कल्याण एसोसिएशन के संरक्षक श्री भूपेश अवस्थी, उ प्र राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष श्री प्रभात मिश्रा की विशेष उपस्थिति रही.

कवि सम्मेलन का प्रारम्भ मा सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया. तत्पश्चात कर्मचारी कल्याण एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री प्रदीप पांडेय, बरिष्ठ उपाध्यक्ष श्री नीरज दीक्षित, उपाध्यक्ष श्री विकास भारतीय, महामंत्री श्री दिनेश बाजपेयी, श्री सुरेश यादव, श्री संजय कुमार, श्री दीपक कुमार, श्री शैलेन्द्र गौड़, श्री सुरेश दिवाकर, श्री प्रवेन्द्र रावत, श्री अनूप सिंह , श्रीमती लेखनी सचान, श्रीमती मंजू पाल द्वारा कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों एवं सम्मानित व लब्ध प्रतिष्ठित कवियों को पुष्प गुच्छ, अंगवस्त्र एवं स्मृति चिन्ह् देकर सम्मानित किया गया.

इस भव्य कवि सम्मेलन की अध्यक्षता बरिष्ठ कवि श्री ओम नारायण शुक्ला जी द्वारा तथा कवि सम्मेलन के मंच का संचालन सुश्री पल्लवी त्रिपाठी द्वारा किया गया.

 

उक्त के अतिरिक्त विश्व विख्यात कवि श्री हेमंत पाण्डेय, श्री धीरज सिंह (चंदन), श्री श्रवण शुक्ला, युवा दिलों की धड़कन श्री मनीष मीत एवं सुश्री नीरु श्रीवास्तव जी द्वारा कविता पाठ किया गया.कवि सम्मेलन में सबका उत्साह देखते बन रहा था
कवियों द्वारा कही गई कुछ कविताओं की पंक्तियाँ निम्नवत है-
हिन्दी, हिन्दू, हिन्द की धरती हो मेरी पहचान
वह धरती जहां भोर की किरणें ,ओम् मंत्र उच्चारें
वह धरती जहां उच्छल सागर नित ही पांव पखारें
वह धरती जहां राम- कृष्ण भी बाल रूप में आयें
वह धरती जहां मां अनुसुइया तीनों देव झुलायें
सातों सात जनम देना ,ईश्वर ये ही वरदान
हिन्दू- हिन्दी-हिन्द की धरती हो मेरी पहचान
पल्लवी त्रिपाठी

नहीं बस एक ही दिन गान गाया जाए हिन्दी का
नहीं बस एक ही दिन नाम लाया जाए हिन्दी का
दिवस कोई न पखवाड़ा मनाया जाए हिन्दी का
ह्रदय में सोच में दीपक जलाया जाए हिन्दी का
मनीष मीत

ये तुलसी सूर के दोहों का गंगा ज्ञान है हिंदी
जो संस्कृत से बनी मिलके हमारी शान है हिंदी
मेरे जीवन का है ये अंश चाहे हो कहीं भी हम
सभी मिलकर कहो अब तो हमारी जान है हिंदी
धीरज सिंह चंदन

अंग्रेजी में खिटपिट कर मत हिन्दी को बदनाम करो
इंग्लिश विंग्लिश छोड़ के बंदे हिन्दी में सब काम करो
स्वप्न सुनहरे क्या तुमने ए बी सीडी मे देखे हैं
हाय हैलो करने वालों तुम हाथ जोड़ के प्रणाम करो
नीरू श्रीवास्तव

आंखों से बह रहा था नीर ले गया
रांझे से जैसे कोई हीर ले गया
आखिरी गुंजाइश आलिया से थी
उसे भी कमबख्त रणवीर ले गया
लाफ्टर फेम हेमन्त पाण्डेय

सब को हंसाने में कितना-कितना रोना पड़ता है ,
सबको हंसाने में बहुत कुछ खोना पड़ता है।
श्रवण शुक्ला जी

आजकल इस बात की चर्चा बडे़ जोरों से है
हर पुराने चोर को खतरा नये चोरों से है
बढ़ गईं हैं नेवलों की और जिम्मेदारियां
आजकल सांपों की गहरी दोस्ती मोरों से है
कवि ओम नारायण शुक्ल

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