19 अगस्त को इस्कॉन कानपुर द्वारा श्री कृष्ण के ज्येष्ठ भ्राता श्री बलराम का आविर्भाव दिवस, बलराम पूर्णिमा का भव्य उत्सव मनाया गया। शास्त्रों के अनुसार भगवान श्री कृष्ण के प्रथम विस्तार श्री बलराम है, जो आगे पुरुष अवतार धारण करके सृष्टि की रचना करते हैं।
श्री बलराम एवं श्री कृष्ण में कोई भेद नहीं है। परंतु वे सदैव सेवक के भाव से श्री कृष्ण के प्रति सेवाएं अर्पित करते हैं।संपूर्ण सृष्टि के जीवों को आनंद प्रदान करने वाले एवं सर्वाधिक बलवान होने के कारण उनका नाम बलराम है।श्री बलराम ही अनंतशेष के रूप में विस्तार करके पूरे ब्रह्मांड को अपने ऊपर धारण करते हैं। वे आदि गुरु तत्व हैं ,सभी प्रमाणिक आध्यात्मिक गुरु उनके प्रतिनिधि हैं। इस पावन उपलक्ष्य पर इस्कॉन कानपुर में अत्यंत विशेष उत्सव का आयोजन हुआ। पूरे मंदिर प्रांगण को आदि गुरु बलराम के आगमन हेतु सुंदरता से सजाया गया। मंगला आरती एवं दर्शन आरती में भक्तों द्वारा श्री बलराम की प्रार्थनाओं के पश्चात प्रातः कालीन श्रीमदभगवतम सत्र आयोजित हुआ। श्रीमान प्रिया गोविंद प्रभु जी के द्वारा इस विशेष कक्षा में भगवान श्री बलराम के गोपनीय तत्व से संबंधित सुंदर कथा की गई। तत्पश्चात बलभद्र बलराम जी के गुणगान में अति सुंदर सुमधुर कीर्तन प्रारंभ हुआ। मृदंग करताल के साथ वैष्णव गीत एवं हरे कृष्ण महामंत्र के आध्यात्मिक तरंगों से संपूर्ण प्रांगण आनंदमय हो उठा।
तत्पश्चात 11:00 बजे से महाभिषेक प्रारंभ हुआ। श्री बलराम का चांदी के कलशों द्वारा पंच गव्य इत्यादि विभिन्न सामग्रियों से आकर्षक अभिषेक किया गया। मध्याह्न श्री बलराम को 108 महाभोग अर्पित किए गए। बलराम पूर्णिमा विशेष आरती के पश्चात सभी श्रद्धालुओं को महाप्रसाद वितरित किया गया। संपूर्ण उत्सव के दौरान भक्तों ने आध्यात्मिक रोमांच का अनुभव किया। बलराम पूर्णिमा के ही दिन श्री राधा कृष्ण झूलन यात्रा का समापन दिवस भी मनाया गया।
श्री भगवान की सुंदर झूलन यात्रा को भव्य रूप से विराम दिया गया। उत्साह पूर्ण संकीर्तन के बीच भक्तों ने भगवान को झूला झुलाया एवं उनके प्रति प्रार्थनाएं अर्पित करीं।



















