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रमज़ान शरीफ में रोज़े के दौरान सिर्फ भूखे, प्यासे रहना इबादत करना ही रोज़ा नही ब्लकि बुरे कार्यो से बचना:हाफिज़ मोहम्मद माज़ हसन

कानपुर, रमज़ान शरीफ में रोज़े के दौरान सिर्फ भूखे, प्यासे रहना इबादत करना ही रोज़ा नही ब्लकि बुरे कार्यो से बचना ज़ुबा से हमेशा सच बोलना, बुरा न देखना, गलत बात न सुनना, किसी के ऊपर जु़ल्म न करना भी ज़रुरी है अगर रोज़दार सिर्फ भूख, प्यास का पालन कर गलत कार्यो में लगा रहता है तो उसको रोज़ा रखना का सवाब तो नही मिलेगा अल्लाह की सज़ा का हक़दार ज़रुर हो जायेगा।
पूरी दुनियां में जानलेवा वबा (कोरोना वायरस ) में लाखो लोगो की मौत हो गयी करोड़ो लोग इस जानलेवा वबा की चपेट मे आ चुके है हमारे मुल्क भारत को भी इस वबा ने अपनी चपेट मे ले लिया है इस बीमारी को फैलने से बचाने के लिए मुल्क के सूबों के वज़ीरों ने रात का कर्फ्यू, मिनी लाकडाउन के फैसले लिए जिसका पालन हमारे सूबों की आवाम पूरी तरह से पालन कर रही है।
मुल्क के कई सूबों में धर्म स्थलों को बंद किया गया है मंदिरों में पूजा, मस्जिदों मे नमाज़, गुरुद्वारा में अरदास व चर्च में प्रार्थना करने में सिर्फ 05 लोगो के जाने की अनुमति है रमज़ान के माह में मस्जिदों में इबादत का विशेष महत्व है लेकिन वबा से निजात के लिए हमे सरकार द्वारा जारी नियमों का पालन करना ज़रुरी है पैगम्बर ए इस्लाम ने भी कहा जिस मुल्क मे रहे उस मुल्क के जायज़ कानूनो और मुल्क मे बनाए गये नियमों का पालन करे वबा व कोई ऐसी मुसीबत परेशानी आने पर नमाज़ो को मस्जिद के बजाए घरों पर ही अदा करने को कहा है। इबादत के बाद इस वबा से निजात के लिए अल्लाह की बारगाह में दुआ करें।

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