6 अप्रैल रविवार,चैत्र मास की नवमी तिथि को इस्कॉन कानपुर में प्रभु श्री रामचंद्र का प्राकट्य उत्सव अत्यंत धूमधाम से मनाया गया। रामनवमीं महोत्सव अत्यंत पवित्र एवं दिव्य है क्योंकि इसी दिन पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान श्री राम इस धरा-धाम पर प्रकट हुए। प्रभु श्री रामचंद्र समस्त जीवात्माओं के परम स्वामी एवं प्रकृति के तीनों गुणों के परे हैं।
त्रेता युग में अपनी लीलाओं के द्वारा मर्यादा पुरुषोत्तम श्री रामचंद्र ने आदर्श चरित्र को स्थापित किया।
इस विशेष दिवस पर इस्कॉन कानपुर में सैकड़ो भक्तों ने श्री भगवान की कृपा प्राप्त करने हेतु उत्साह से सेवाओं एवं आध्यात्मिक कार्यक्रमों में भाग लिया।
सर्वप्रथम भक्तों ने प्रातः कालीन मंगला आरती दर्शन में श्री श्री जानकी वल्लभ लक्ष्मण हनुमान जी की कृपा प्राप्त की। मंदिर अध्यक्ष श्रीमान प्रेम हरि नाम प्रभु जी ने सभी भक्तों का अभिवादन करते हुए रामनवमी पर भक्तिभाव विकसित करने की प्रेरणा दी।
श्रृंगार आरती में श्री रामचंद्र विशेष पोशाक एवं आभूषणों से सुसज्जित सर्व आकर्षक प्रतीत हो रहे थे। भगवान के जन्मदिवस के शुभ अवसर पर उन्हें नई पोशाक अर्पित की गई और वेदी को रजनीगंधा एवं मोगरा के सुगंधित पुष्पों से भव्य रूप से सजाया गया। संपूर्ण मंदिर प्रांगण को श्री राम की प्रसन्नता हेतु कुशलता से सजाया गया। हरे कृष्ण महामंत्र एवं प्रभु श्री राम की स्तुतियों ने सभी के हृदय को प्रेम रस से आप्लावित किया। रामनवमी उत्सव की पूर्णता श्री रामचंद्र का गुणगान वैष्णवों के द्वारा सुनने में है।
इसी उद्देश्य के साथ इस्कॉन कानपुर में श्री राम कथा की विशेष श्रृंखला का आयोजन किया गया था।प्रातः कालीन सत्र में इस्कॉन पुणे से आए हुए वरिष्ठ भक्ति एवं अद्भुत कथाकार श्रीमान सुंदर श्याम प्रभु जी के द्वारा श्री रामचंद्र के आध्यात्मिक गुना का हृदय स्पर्शी वर्णन किया गया। मध्यान 11 बजे से श्री श्री जानकी जानकी वल्लभ लक्ष्मण हनुमान जी का 108 चांदी के कलशों से मनोरम अभिषेक संपन्न हुआ।
संध्याकालीन कार्यक्रम में सर्वप्रथम श्री श्री सीताराम जी की अत्यंत सुंदर पालकी महोत्सव का आयोजन हुआ।
तत्पश्चात श्री रामलीला मंचन एवं रामायण नृत्य प्रस्तुति ने सभी के चित्त को श्री राम में स्थिर कर दिया। मंदिर अध्यक्ष श्रीमान प्रेम हरि नाम प्रभु जी के द्वारा उपस्थित भक्तगणों का उत्साह वर्धन किया गया एवं श्री रामचंद्र भगवान के जीवन चरित्र से शिक्षा लेने की प्रेरणा प्रदान की गई। संपूर्ण मंदिर प्रांगण को दीपों से सुसज्जित किया गया।
वास्तव में मंदिर प्रांगण साकेत धाम सदृश प्रतीत हो रहा था। इस आनंदमय कार्यक्रम के पश्चात सभी भक्तों को स्वादिष्ट प्रसाद वितरित किया गया।


















